आगरा महोत्सव में बुधवार को देश के प्रख्यात कवियों ने दुश्मनों को ललकारा। उन्हें चेतावनी दी कि अपनी नापाक हरकतों से बाज आ जाएं, वरना देश का सैनिक उन्हें सबक सिखाएगा। वीर रस की कविताएं सुनकर जहां श्रोताओं की रगों में खून उबाल लेना लगा, वहीं हास्य और व्यंग्य की कविताओं ने लोगों को खूब गुदगुदाया। कवियों ने राजनीतिक पर भी कटाक्ष किए। अवसर था कोठी मीना बाजार में आयोजित आगरा महोत्सव में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का।
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कवि हरिओम पवार।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ एससी आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रामशंकर कठेरिया, मृदुला कठेरिया ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर
किया। मेरठ से आए वीर रस के प्रख्यात कवि डॉ. हरिओम पवार की रचना ‘किसका खून नहीं खौलेगा, पढ़-सुनकर अखबारों में, शेरों की पेशी करवा दी, चूहों के दरबारों में’ सुनकर श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे।
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आगरा महोत्सव में कवि सम्मेलन।
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जबलपुर से आए सुदीप भोला ने जब एक अबोध बच्ची की का दर्द अपनी कविता ‘गौरैया ने बागों में आना छोड़ दिया है, कोयल ने भी दहशत में अब गाना छोड़ दिया है’ सुनाई, तो दर्शक काफी भावुक हो गए।
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कवि प्रवीण शुक्ला।
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दिल्ली से आए कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल ने ‘मैंने जिन्न से कहा, भारत से भ्रष्टाचार भगा दो, जिन्न बोला, मैं बोतल में घुस रहा हूं, ऊपर से ढक्कर हटा दो’ सुनाकर लोगों को खूब हंसाया।
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कवि पूनम वर्मा।
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अलवर से आए कवि विनीत चौहान की कविता ‘अगर 47 में सेना के थोड़े से कदम बढ़ा देते, पाक नाम की चिड़िया को धरती से तभी मिटा देते’ को खूब वाहवाही मिली। मथुरा से आईं कवयित्री पूनम वर्मा ने मीरा सी दीवानी हम, रांझे की हीरानी हम, तेवर से आग लगा दें, सागर के पानी में हम सुनकार श्रोताओं की वाहवाही लूटी।