आगरा में महिलाओं से यौन शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यहां तक की बच्चियों के साथ भी हैवानियत की जा रही है, लेकिन पुलिस की लचर कार्रवाई से पीड़ितों की न्याय की आस अटकी है। 2017 और 2018 के 30 मामलों में पुलिस अब तक जांच पूरी नहीं कर सकी है।
ताजनगरी में अगर दुष्कर्म के मामलों को देखें तो साल 2016 में 92 केस दर्ज हुए। इनमें से सात मामले ही फर्जी पाए गए। बाकी जांच पूरी कर दी। वहीं 2017 में 86 मामले आए। इनमें से सात अब भी लंबित हैं। वहीं 2018 में 31 मामले अब तक सामने आ चुके हैं। इनमें 23 में जांच चल रही है। जांच पूरी नहीं होने से पीड़ित भटकने को मजबूर हैं।
आगरा में बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। बच्चियों के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकत आम बात है। वहीं दुष्कर्म के मामले भी कई बार सामने आ चुके हैं। एत्माद्दौला, ताजगंज, जगदीशपुरा समेत अन्य क्षेत्रों में कई घटनाएं हो चुकी हैं।
बच्चियों से अश्लील हरकत जानकार लोग करते हैं। शाहगंज और मलपुरा क्षेत्र के दो मामलों में किशोरियों को पिता ही हवस का शिकार बना रहे थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी। इसके अलावा भी बच्चियों को अगवा कर हैवानियत की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
आगरा में रेप मामलों की बात करें तो वर्ष 2016 में 92 केस सामने आए। इसमें सात खारिज कर दिए गए। इसी तरह 2017 में 86 में आठ और 2018 में 31 में तीन मामले खारिज किए गए। वहीं 2016 में 14 मामलों में एफआर, 71 में चार्जशीट दाखिल की गई। 2017 और 2018 में 13 में एफआर और 63 में चार्जशीट लगी।