होली खेल रहे नंदलाल, वृंदावन की कुंज गलिन में...रंगभरनी एकादशी पर कुछ ऐसा ही अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। तीर्थनगरी वृंदावन में रविवार को इतना रंग बरसा कि हर कोई सराबोर हो गया। अपने आराध्य के साथ होली खेलने के लिए शाम तक भक्तों का हुजूम परिक्रमा मार्ग के साथ बांकेबिहारी मंदिर के प्रमुख मार्गों पर लगा रहा। नगर के मंदिरों में राधे राधे की गूंज रही।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर में श्रृंगार आरती के बाद जनजन के आराध्य ठाकु ने जब भक्तों संग होली खेली तो चहुंओर अद्भुत और अलौकिक होली के रंग बिखरने लगे। बांकेबिहारी के जयकारों के बीच धक्का-मुक्की की परवाह किए बिना श्रद्धालुओं ने होली का आनंद लिया। हरा, गुलाबी, लाल, पीला, केसरिया आदि रंगों का गुलाल सेवायतों ने भक्तों पर डाला।
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बांकेबिहारी मंदिर में होली के रंगों की वर्षा
- फोटो : अमर उजाला
रंगभरनी एकादशी पर पहली बार वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सुबह से होली की शुरुआत हुई। सेवायतों ने सबसे पहले रजत सिंहासन पर श्वेत पोशाक धारण कर विराजमान हुए ठाकुर बांकेबिहारी के गालों पर गुलाब जल और केसर से तैयार की गई कीच लगाई। इसके साथ ही मंदिर में होली की शुरुआत हो गई। यह क्रम दोपहर राजभोग आरती तक जारी रहा।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों पर बरसा 'प्रेमरंग'
- फोटो : अमर उजाला
शाम को फूलों की होली का आनंद लेने के लिए श्रद्धालु समय से पूर्व ही बांके बिहारी मंदिर परिसर में में पहुंच गए। शाम 4.30 बजे मंदिर के गेट खुलते हुए श्रद्धालु जयघोष के साथ अंदर प्रवेश कर गए। यहां फूलों की होली खेली गई।
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बांकेबिहारी मंदिर को जाने वाले रास्ते में भीड़
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत पिचकारियों में रंग भरकर भक्तों पर डाल रहे थे। अपने आराध्य के आंगन में रंगों से सराबोर विभिन्न राज्यों से आए भक्त खुद को कृतज्ञ समझ रहे थे।