कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हुए विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान का पार्थिव शरीर देर रात तक आगरा आ सकता है। उनका अंतिम संस्कार अब ताजगंज शमशान घाट पर होगा। पहले पोइया घाट पर अंतिम संस्कार होना था। परिजनों की इच्छा अनुसार अंतिम संस्कार का स्थान बदला गया है। जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह ने बताया कि राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शुक्रवार शाम तकरीबन 3:36 बजे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे। उन्होंने शहीद विंग कमांडर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान आगरा के सरन नगर (दयालबाग) के रहने वाले थे। सीडीएस बिपिन रावत के साथ वह भी बुधवार को हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हो गए थे। उनके निधन से सरन नगर की हर आंख नम है, गली में मातम छाया हुआ है। उनके निधन की खबर मिलने के बाद से ही उनके घर सांत्वना देने वाले के लिए लोग पहुंच रहे हैं।
2 of 5
विंग कमांडर के घर के बाहर खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
सरन नगर कॉलोनी का होनहार पृथ्वी अब इस दुनिया में नहीं रहा। पड़ोसी उनकी सादगी और जांबाजी के किस्से साझा कर रहे थे। रुंधे गले से रिश्तेदार उसकी बचपन की यादों में बार-बार खो जाते थे। बृहस्पतिवार को दिनभर घर पर लोगों का आना-जाना लगा रहा। लोगों ने शहीद की तस्वीर के आगे पुष्प अर्पित किए।
3 of 5
शहीद पृथ्वी सिंह चौहान (लाल स्वेटर)
- फोटो : अमर उजाला
जांबाज विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान की सादगी और जज्बे का हर कोई कायल था। वह जब भी घर आते थे तो पड़ोसियों और रिश्तेदारों से जरूर मिलते थे। उनके करीबी रिश्तेदारी पुष्पेंद्र जादौन ने बताया कि वह बचपन से ही साहसी थे। बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखते थे, लेकिन सपना फौजी बनने का था। यही कारण रहा कि उन्होंने साल 1990 में आर्मी स्कूल ज्वॉइन कर लिया था।
4 of 5
हेलीकॉप्टर हादसा: शहीर पृथ्वी सिंह के घर में गमगीन लोग
- फोटो : अमर उजाला
पृथ्वी सिंह चौहान अपनी बहनों से कहते थे कि वह एक दिन परिवार का नाम रोशन करेंगे। वह एक कुशल पायलट होने के साथ ही उत्साही व्यक्ति भी थे, जो दूसरे लोगों को भी जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे।
5 of 5
पृथ्वी की परिवार के साथी ली गई सेल्फी
- फोटो : अमर उजाला
सरन नगर निवासी राजेश सिंह ने बताया कि पृथ्वी छुट्टी पर आते थे तो मुलाकात होती थी। हमेशा ही वे फौजियों की जांबाजी की चर्चा करते थे। तमाम किस्से सुनाते थे। उनके पिता सुरेंद्र सिंह बेटे के गम में गुमसुम हो गए हैं। मां सुशीला बार-बार पृथ्वी को याद कर रही थीं। उनकी बातों को याद कर रही थीं।