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Hathras Accident: सिसकियों में दब गए लफ्ज...अश्क बनकर बहा दर्द, दिलासा देने वाले हाथ भी कांपे; रूह भी कांप उठी

Sun, 08 Sep 2024 02:08 PM IST
शाहरुख खान धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला, आगरा
धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला, आगरा Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 08 Sep 2024 02:08 PM IST
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Hathras Road Accident News 14 bodies set out on their final journey Samra village in Agra cried out in pain
Hathras Road Accident - फोटो : अमर उजाला
हाथरस में हुए सड़क हादसे में अपनों को खोने वालों का दर्द कलेजा चीर रहा था। मुन्ना और चुन्नासी के घरों में कोहराम मचा था तो नूर मोहम्मद के घर सिसकियां सन्नाटा तोड़ रही थीं। सिसकियों के कारण लफ्ज नहीं निकल रहे थे, आंखों से अश्कों की झड़ी लगी थी। ढांढस बंधाने वाले हाथ भी कांप रहे थे।


 
Hathras Road Accident News 14 bodies set out on their final journey Samra village in Agra cried out in pain
Hathras Road Accident - फोटो : अमर उजाला
सैमरा में मातम की स्याह रात बीती और सूरज की किरणें फूटीं तो सुबह रोजाना की तरह खुशनुमा नहीं थी। आंगनों में बच्चों की किलकारियां गायब थीं। गांव में मौजूद हर चेहरे पर दर्द की लकीर सी खिंची थीं।
Hathras Road Accident News 14 bodies set out on their final journey Samra village in Agra cried out in pain
Hathras Road Accident - फोटो : अमर उजाला
आसपास के घरों के बच्चे भी स्कूल नहीं गए। चुन्नासी उर्फ चुन्ने खां शून्य में ताक रहे थे, जैसे कह रहे हों.. विकलांगता का दर्द क्या कम था जो अब बेटे, बेटी, नातियों को छीनकर जीने का सहारा छीन लिया।

 
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Hathras Road Accident News 14 bodies set out on their final journey Samra village in Agra cried out in pain
Hathras Road Accident - फोटो : अमर उजाला
अब किस के सहारे बुढ़ापा कटेगा। रिश्तेदार उनकी पत्नी फूलबानो को दिलासा देने की कोशिश कर रहे थे। वो कभी सिसकतीं तो कभी बेसुध हो जातीं। 
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Hathras Road Accident - फोटो : अमर उजाला
दर्द का यह मंजर एक घर तक सीमित नहीं था। बेदरिया के घर में भी यही हाल था। कोई बिलख रहा था, कोई अपनों के आंसू पोंछ रहा था। नूर मोहम्मद के घर का हाल भी कुछ जुदा न था।
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