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Guru Teg Bahadur Shaheedi Diwas: गुरु का ताल में नौ दिन नजरबंद रहे थे गुरु तेग बहादुर, यहीं से दी थी गिरफ्तारी
Mon, 28 Nov 2022 07:02 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 28 Nov 2022 07:02 AM IST
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श्रीगुरु तेग बहादुर
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Guru Teg Bahadur Shaheedi Diwas: गुरु तेग बहादुर का शहादत दिवस 28 नवंबर को मनाया जा रहा है। सिखों के दस गुरुओं में से नौवें गुरु तेग बहादुर जी का आगरा से गहरा नाता है। गुरु तेग बहादुर ने आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल से ही गिरफ्तारी दी थी। गुरु तेग बहादुर जी उस समय धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थक थे, जब लोगों का जबरन धर्म परिवर्तन किया जा रहा था।
गुरुद्वारा गुरु का ताल
- फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा गुरु का ताल के सेवक गुरनाम सिंह ने बताया कि जब औरंगजेब ने श्रीगुरु तेग बहादुरजी की गिरफ्तारी का फरमान जारी किया। तब श्रीगुरु ने खुद औरंगजेब के पास जाने का निश्चय किया और आनंदपुर साहिब से चल दिए।
यहीं नजर बंद रहे थे श्रीगुरु तेग बहादुर
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में जस्सी माई (माईथान में) से मिलने के बाद श्रीगुरु तेग बहादुर ने शहर के बाहर सिकंदरा के पास ककरैठा गांव में बने ताल (उस समय बादशाही बगीची) में डेरा डाला था। औरंगजेब ने यहां उन्हें नजरबंद कर नौ दिन तक रखा था। यहां के कुएं का पानी खारा था।
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बरगद का पेड़
- फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा गुरु का ताल के सेवक गुरनाम सिंह ने बताया कि गुरुजी के आशीर्वाद से कुएं का पानी मीठा हो गया, जो आज भी मीठा है। यहां वर्षों पुराना बरगद का पेड़ भी है। औरंगजेब के 12 हजार सिपाही यहां से गुरुजी को गिरफ्तार कर दिल्ली ले गए थे।
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शरद पूर्णिमा के अवसर पर लोगों को दवा देते संत बाबा प्रीतम सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
गुरुद्वारा गुरु का ताल के संरक्षक बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि जब श्रीगुरु तेग बहादुरजी इस स्थान पर नजरबंद किए गए थे, तब यहां छोटी सी बारादरी थी। उनकी गिरफ्तारी के बाद ककरैठा के लोग अक्सर यहां आकर अरदास करते थे। सन 1971 में संत बाबा निरंजन सिंह महाराष्ट्र से आगरा आए और सभी संगतों से निवेदन कर गुरुद्वारे की आसपास की जगहों को खरीदा। अब 18 एकड़ में यह गुरुद्वारा बसा है। पूरे उत्तर प्रदेश में अकेला गुरुद्वारा है, जिसमें 24 घंटे लंगर चलता है। यहां लोगों की सेवा के लिए 500 लोग रहते हैं।