कासगंज की पटियाली तहसील के बरौना गांव की आबादी में कटान शुरू हो चुका है। किनारे की आबादी के लोग अपना सामान,चारा समेट कर सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने लगे हैं। कुछ लोगों ने तो टीलों पर डेरा जमाना शुरु कर दिया है। तकरीबन 40 किसानों की 100 बीघा कृषि भूमि गंगा के कटान में समां गई। अब आबादी के इलाके में गंगा का कटान शुरू हो चुका है। करीब पांच हजार की आबादी के सामने यह बड़ा संकट है कि कब गंगा की धारा आबादी के इलाके में कटान तेज कर दे।
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कासगंज में बाढ़ का खतरा: लोगों ने समेटा सामान, टीलों पर डाला डेरा, भयावह हैं ये तस्वीरें
Mon, 08 Aug 2022 10:05 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 08 Aug 2022 10:05 AM IST
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कासगंज में बाढ़ का खतरा
- फोटो : अमर उजाला
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गांव तक पहुंचा पानी
- फोटो : अमर उजाला
प्रभावित किसान
बरौना के नूर मोहम्मद, कुंवरपाल, धनपाल, सूबेदार, पप्पू, नवी अहमद, नूर मोहम्मद, जुम्मन, गोकरनी, नसीर, संटू, भूरे, अगन लाल, रामकुमार, रेवाड़ी लाल, सुजान, चंद्रभान, दिनेश मिश्रा, अनिल सक्सेना, रामभजन, कुंवरपाल शाक्य, इशरार, सकूर, किशन लाल, इतवारी, गंगा सिंह, रामपाल, प्रकाश, प्रेमपाल, हेम सिंह, रामसेवक सहित तकरीबन 40 किसानों की 100 बीघा से अधिक जमीन कट चुकी है।
शुरू हुआ कटान
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों की बात
भूरे ने बताया कि मेरी चार बीघा जमीन गंगा के कटान में कट चुकी है। केवल दो बीघा जमीन ही बची है। ऐसी स्थिति में परिवार के सामने संकट है। कटान रुक नहीं पा रहा। अब तो केवल भगवान का भरोसा है।
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पशुओं के लिए चारा ले जाते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
धनवीर ने कहा कि काफी समय पहले से गंगा की धारा यहां कटान कर रही थी। सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए कार्य किए, लेकिन कारगर साबित नहीं हो पाए। गांव की ओर कटान शुरू हो चुका है। मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।
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सामान समेटते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
प्रधान प्रतिनिधि महेश का कहना है कि पिछले साल से ही खेतों में कटान शुरू हो गया था, लेकिन तब कटान कम था, लेकिन अब कटान तेज हो गया है। गांव की आबादी में तेजी से कटान होने लगा है। जिससे गांव को खतरा बन गया है।