{"_id":"6312ae7cbee8972ecc76774a","slug":"former-minister-ramveer-upadhyay-passed-away-know-political-career-in-uttar-pradesh","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Agra News: पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का निधन, मायावती के खासमखास रहे, दो दशक तक बसपा में बोली तूती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का निधन, मायावती के खासमखास रहे, दो दशक तक बसपा में बोली तूती
Sat, 03 Sep 2022 07:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 03 Sep 2022 07:01 AM IST
विज्ञापन
रामवीर उपाध्याय और मायावती (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता रहे रामवीर उपाध्याय 25 वर्षों तक ब्रज में बसपा की ब्राह्मण राजनीति का बड़ा चेहरा रहे। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का खास माना जाता था। जिसके दम पर उन्होंने पहले हाथरस और फिर आगरा में अपनी जमीन बनाई और फिर गहरी जड़ जमाई थी।
रामवीर उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
मायावती ने कैबिनेट मंत्री के रूप में ऊर्जा, चिकित्सा शिक्षा, परिवहन व ग्रामीण समग्र विकास जैसे विभागों का मंत्री बनाया। 2019 लोकसभा चुनाव के समय रामवीर का बसपा से मोहभंग हो गया। भाजपा अध्यक्ष के रूप में 2019 में अमित शाह जब आगरा आए तो रामवीर ने आगरा कॉलेज मैदान पर उनके साथ मंच साझा किया था। लेकिन विधिवत भाजपा की सदस्यता नहीं ली।
रामवीर उपाध्याय और सीमा उपाध्याय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उस दौरान चर्चा थी कि वह पत्नी सीमा को फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाना चाहते हैं, लेकिन भाजपा ने यहां जाट कार्ड पर ही भरोसा जताया। राजकुमार चाहर को प्रत्याशी बनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
एसपी सिंह बघेल और रामवीर उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
2019 चुनाव के बाद बसपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। तीन साल बाद रामवीर ने बसपा से इस्तीफा दे दिया। विधान सभा चुनाव 2022 में भाजपा के टिकट पर सादाबाद से चुनाव लड़ा। कांटे की टक्कर में करीब सात हजार वोट से सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी प्रदीप चौधरी उर्फ गुडू से हार गए।
विज्ञापन
सीमा उपाध्याय और उनके पति पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय
गुड्डो को 1.04 लाख वोट मिले थे जबकि रामवीर को 98 हजार वोट मिले। उस समय उनका स्वास्थ्य खराब था। प्रचार में नहीं गए। 25 साल में पहली बार हार का सामना करना पड़ा था।