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जवाहर बाग कांड: 2 जून 2016 की वो काली शाम, जिसे याद कर सिहर उठते हैं लोग
Sun, 02 Jun 2019 11:14 AM IST
मुकेश कुमार
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 02 Jun 2019 11:14 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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2 जून 2016 की वो काली शाम, जब हिंसा की आग में मथुरा का जवाहर बाग जल उठा था। उस मंजर को याद कर आज भी लोग सिहर उठते हैं। हर तरफ भगदड़, घबराहट, जिंदगी बचाने की जद्दोजहद थी। हिंसा में दो पुलिस अधिकारी शहीद हो गए थे। कई कब्जाधारियों के शव भी जवाहर बाग से बरामद किए गए थे। तीन साल पहले हुई घटना से हरा भरा जवाहर बाग वीरान हो गया था। आज भी उसके निशान मौजूद हैं।
अपने परिवार के साथ तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव ने जवाहर बाग को रामवृक्ष यादव के कब्जे से मुक्त कराने के लिए अपनी जान गंवा दी थी। 27 कब्जाधारियों की भी मौत हुई, लेकिन इस सबसे बड़ी हिंसा की जांच बेहद सुस्त तरीके से हो रही है। पहले तो पुलिस ने ही हीलाहवाली की, लेकिन अब सीबीआई भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
फाइल फोटो
- फोटो : Amarujala
जवाहरबाग में जिन 9 लोगों के जले शव मिले थे उनकी पहचान नहीं हो पाई। मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव मारा गया, यह पुलिस अपने रिकॉर्ड में बता रही है। लेकिन कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक नहीं है। पुलिस ने जिस शव को रामवृक्ष का बताकर उसका डीएनए लिया था, उसका मैच उसके बेटे के डीएनए से हो नहीं पाया था। सीबीआई भी अपने स्तर से डीएनए की जांच करा रही है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
यह था पूरा घटनाक्रम
- मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव गाजीपुर के गांव बाघपुर का रहने वाला था।
- रामवृक्ष यादव ने 2013 में स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन का गठन किया।
- 11 जनवरी 2014 को मध्यप्रदेश के सागर जिले से सत्याग्रह यात्रा शुरू की थी।
- फरवरी 2014 में रामवृक्ष यादव मथुरा पहुंचा और जवाहरबाग में दाखिल हुआ।
- 280 एकड़ के जवाहरबाग पर कब्जा कर लिया था।
- जवाहरबाग खाली कराने पहुंचे अफसरों को जवाहरबाग में बंधक बनाया था।
- जवाहरबाग में उद्यान विभाग के कार्यालय पर भी कब्जा कर लिया था।
- 1 जून 2016 को जवाहरबाग खाली कराने के लिए प्रशासन ने प्लान बनाया था।
- 2 जून 2016 को जवाहरबाग खाली कराने पहुंचे थे तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी।
- 2 जून 2016 को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई।
- 5 जून 2016 को पहुंचे डीजीपी ने कहा था कि रामवृक्ष यादव मारा गया है।
- 6 जून को स्थानीय पुलिस ने भी दावा किया कि रामवृक्ष मारा गया है।
- 10 जून 2016 को शासन ने जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया।
- मार्च 2017 को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश किए थे।
- जवाहरबाग हिंसा में 101 लोगों को जेल भेजा गया था।
- जेल में बंद तीन आरोपियों की बीमारी के चलते मौत हो गई।
- अभी तक 12 लोगों को जमानत मिल चुकी है।
- मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव गाजीपुर के गांव बाघपुर का रहने वाला था।
- रामवृक्ष यादव ने 2013 में स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन का गठन किया।
- 11 जनवरी 2014 को मध्यप्रदेश के सागर जिले से सत्याग्रह यात्रा शुरू की थी।
- फरवरी 2014 में रामवृक्ष यादव मथुरा पहुंचा और जवाहरबाग में दाखिल हुआ।
- 280 एकड़ के जवाहरबाग पर कब्जा कर लिया था।
- जवाहरबाग खाली कराने पहुंचे अफसरों को जवाहरबाग में बंधक बनाया था।
- जवाहरबाग में उद्यान विभाग के कार्यालय पर भी कब्जा कर लिया था।
- 1 जून 2016 को जवाहरबाग खाली कराने के लिए प्रशासन ने प्लान बनाया था।
- 2 जून 2016 को जवाहरबाग खाली कराने पहुंचे थे तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी।
- 2 जून 2016 को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई।
- 5 जून 2016 को पहुंचे डीजीपी ने कहा था कि रामवृक्ष यादव मारा गया है।
- 6 जून को स्थानीय पुलिस ने भी दावा किया कि रामवृक्ष मारा गया है।
- 10 जून 2016 को शासन ने जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया।
- मार्च 2017 को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश किए थे।
- जवाहरबाग हिंसा में 101 लोगों को जेल भेजा गया था।
- जेल में बंद तीन आरोपियों की बीमारी के चलते मौत हो गई।
- अभी तक 12 लोगों को जमानत मिल चुकी है।
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जवाहर बाग मथुरा
- फोटो : अमर उजाला
जवाहरबाग हिंसा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उस वक्त शासन ने कहा था कि मार्च 2014 से जून 2016 तक जो भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रहे उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माना गया कि अगर इन अधिकारियों ने प्रयास किए होते तो जवाहरबाग को खाली करा लिया गया होता। लेकिन अफसरों ने प्रयास नहीं किए।