कासगंज जिले के अमांपुर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। यहां एक घर में परिवार के पांच सदस्यों के शव मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, घर के मुखिया ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों की हत्या करने के बाद खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
पड़ोसियों तथा रिश्तेदारों से पूछताछ के बाद डीआईजी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि इस दुखद वारदात के पीछे मुख्य रूप से आर्थिक तंगी का कारण नजर आ रहा है। परिवार के सदस्यों की मौत करीब तीन दिन पहले हुई बताई जा रही है। घटना से पहले मृतक ने घर के सभी दरवाजे अंदर से बंद कर दिए थे और एक दरवाजे पर ताला भी लगा दिया था। इसके बाद उसने पत्नी और बच्चों की जान ली और खुद फंदे पर लटक गया।
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घटनास्थल पर जमा भीड़ और लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिवार के मुखिया सत्यवीर ने अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए गांव छोड़ा और अमांपुर में आकर वेल्डिंग का काम करने लगा। सत्यवीर ने अपने बच्चों के लिए सुनहरे भविष्य का सपना देखा, लेकिन आर्थिक तंगी और बेटे की बीमारी ने उसके साथ उसके परिवार के लोगों के सपने छीन लिए। जिंदगी की जंग में सत्यवीर कमजोर पड़ गया।
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घटनास्थल पर पहुंचे विधायक और पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद ने बताया कि पहले से ही सत्यवीर के हालात आर्थिक रूप से तंग थे, लेकिन बेटे की बीमारी से हालात और खराब हो गए। सत्यवीर के बेटे ग्रीश को न्यूरो की समस्या थी। सिर में किसी नस की समस्या से जूझ रहा था। इस वजह से उसके इलाज का काफी खर्चा हो रहा था। कुछ दिन पहले ही पड़ोसी से एक हजार रुपये उधार लिए थे। उसने लोगों से आर्थिक मदद ली। लोगों से बातचीत में यह भी सामने आया कि परिवार के लोग उसे सहयोग नहीं कर रहे थे। इस बात से सत्यवीर बेहद आहत था।
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आत्महत्या करने वाले परिवार के घर में बुझा चूल्हा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घर से मदद न मिली तो अवसाद में डूब गया सत्यवीर
पड़ोसियों ने बताया कि सत्यवीर चार दिन पहले मदद के लिए गांव गया था, लेकिन मदद नहीं मिली। इसके बाद से ही वह गहरे अवसाद में चला गया और पत्नी और बच्चों की जान लेने के बाद खुद भी जान दे दी। सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद के मुताबिक सत्यवीर करीब 8 वर्ष पूर्व अपने मूल गांव नगला भोजराज से अमांपुर में आकर रहने लगा था, यहां पेट्रोल पंप के पीछे किराए पर रहने लगा, जिसमें एक दुकान थी और पीछे 10 गुणा 10 फीट के एक छोटे से कमरे में परिवार रह रहा था। परिस्थितियों ने उसे घोर अवसाद में ढकेल दिया।
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मौके पर जांच के लिए पहुंची पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
न चूल्हा जला, न घर में खाना मिला
तीन दिन से बंद मकान को जब खोला गया तो पुलिस को चूल्हा साफ मिला। इसके आसपास कोई बर्तन भी नहीं था। न ही कोई खाने-पीने का सामान ही मिला। उसके घर में कुछ खास सामान भी नहीं था। मौत कब, किस समय हुई, परिवार के लोगों ने खाना खाया या नहीं, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौके पर चूल्हे में राख तो दिखाई दी, लेकिन आसपास बर्तन थे और न ही सामान। थाली और बर्तनों में खाना भी रखा नहीं मिला। बच्चे की बीमारी और तंगहाली ने अवसाद में डूबे सत्यवीर को यह खौफनाक कदम उठाने को मजबूर कर दिया।