आगरा के दयालबाग स्थित मौजा जगनपुर में चक रोड पर दीवार विवाद में तनाव के हालात बन गए हैं। प्रशासनिक टीम ने जिस दीवार को अवैध बताते हुए शनिवार को ध्वस्त किया था उसे देर रात सत्संगियों ने दोबारा खड़ा कर दिया। रविवार को इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल की तहरीर पर प्रशासन ने सत्संगियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है। मुकदमे में पांच नामजद समेत 20 से अधिक अज्ञात सत्संगियों के नाम दर्ज हैं।
आगरा दयालबाग प्रकरण: सत्संगियों ने रात में दोबारा बनाई दीवार, प्रशासन ने कराई एफआईआर
रविवार को प्रशासन ने सत्संगियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा व सार्वजनिक भूमि पर कब्जे के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट लक्ष्मी एन सिंह ने बताया कि पांच आरोपी नामजद हैं। 20 से अधिक अज्ञात हैं। प्रशासनिक टीम के कार्य में हस्तक्षेप व जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है।
आरोप: पौधे लगाकर स्वरूप बदलने की कोशिश
थाना दिवस में अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कराने वाले सिद्धार्थ गुप्ता ने प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया है कि सार्वजनिक रास्ते को दबंगों ने दीवार खड़ी कर रोक दिया। रास्ते में पौधे लगाकर उसका स्वरूप बदलने की कोशिश की गई। प्रार्थनापत्र में सार्वजनिक रास्ते को खोले जाने की मांग की गई थी।
10 महीने पहले दिए थे आदेश
30 सितंबर 2020 को जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने शिकायत पर एसीएम-प्रथम व थाना प्रभारी न्यू आगरा को स्थलीय निरीक्षण कर रास्ता खोलने के आदेश दिए थे। परंतु तब तीन महीने तक टीम स्थलीय निरीक्षण को नहीं गई। फिर मार्च 2021 में तत्कालीन एसडीएम अरुनमोली और तहसीलदार प्रेमपाल सिंह ने दोबारा जांच के बाद दीवार को तोड़ कर रास्ता खुलवाया। तब सत्संगियों पर एसडीएम से अभद्रता करने के आरोप लगे। जिसके बाद डीएम ने कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए, परंतु चार महीने में कोई कार्रवाई नहीं की। उधर, मार्च में तोड़ी गई दीवार सत्संगियों ने दोबारा खड़ी कर ली। शनिवार को दूसरी बार दीवार हटाई गई, जिसे टीम के लौटने के बाद रात में दोबारा बना दिया गया है।
सोशल मीडिया पर चली मुहिम
दयालबाग में बने हालातों के बाद सत्संगियों ने सोशल मीडिया पर जिला प्रशासन के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी है। कोई जिला प्रशासन को भूमाफिया हाथों बिका हुआ बता रहा है, तो कोई प्रशासन की कार्रवाई की निंदा कर रहा है। ट्वीट में डीएम प्रभु एन सिंह के साथ पीएम, सीएम को टैग किया जा रहा है। सत्संगी प्रशासन के बहाने सरकार को भी घेर रहे हैं। इधर, जगनपुर का रास्ता बंद होने के कारण प्रभावित लोग सत्संगियों पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगा रहे हैं।
बिल्डरों के लिए रास्ता बना रहा प्रशासन
राधास्वामी सत्संग सभा के सचिव जीपी सत्संगी का कहना है कि प्रशासन निष्पक्ष नहीं है। 1935 से यह भूमि हमारे स्वामित्व में है। प्रशासन का अनाधिकृत कब्जा बताना गलत है। प्रशासन को तीन बार वास्तविक नक्शा दे चुके हैं। नपत कराने का तरीका भी इनका संदेहास्पद है। यह नक्शे की फॉटोकापी लाकर पोहिया घाट रोड से नपाई करते हैं, जबकि वास्तविक नक्शे के साथ मुड्डी से नापा जाना चाहिए। बिना सूचना दिए दीवार तोड़ देना प्रशासन की मनमानी है। यह मामला कोर्ट में भी चल रहा है। हकीकत में प्रशासन बिल्डिरों की कॉलोनियों के लिए रास्ता बना रहा है। सोमवार को एसडीएम के साथ बैठक है, जिसमें हम नक्शा लेकर अपनी बात रखेंगे।