देश में मुगलिया शासन के दौरान जहां सोने-चांदी के सिक्के ढाले जाते थे, फतेहपुर सीकरी की वह टकसाल अब संवारी जाएगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 48 लाख रुपये की लागत से इस टकसाल का संरक्षण कार्य शुरू करने वाला है। जनवरी से संरक्षण कार्य शुरू होगा, जिसमें टकसाल के फर्श के खराब हो चुके लाल बलुई पत्थरों को बदला जाएगा। दीवारों की मरम्मत करने के बाद यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा।
नए साल में बदलेगी सूरत: फतेहपुर सीकरी में जहां ढलते थे सिक्के, संवारी जाएगी वह टकसाल
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जनवरी में शुरू करा दिया जाएगा संरक्षण कार्य
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजकुमार पटेल ने बताया कि टकसाल का संरक्षण कार्य जनवरी में शुरू करा दिया जाएगा। उसके पूरा होने के बाद यहां इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा। इस सेंटर में ऑडियो-वीडियो के साथ कुछ गैलरी रहेंगी, जिनमें पर्यटक फतेहपुर सीकरी के इतिहास, संस्कृति के बारे में जान सकेंगे।
फतेहपुर सीकरी को राजधानी बनाने के बाद मुगल बादशाह अकबर ने आगरा गेट की ओर टकसाल बनाई। यहां जिस जगह म्यूजियम है, वहां पहले शाही खजाना रखा जाता था, उसके ठीक सामने टकसाल में सिक्कों की ढलाई होती थी।
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