डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षा विभाग के गोपनीय सेक्शन में बदइंतजामी है। यहां लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। उनके शैक्षणिक दस्तावेज को चूहे, दीमक नुकसान पहुंचा रहे हैं। गोपनीय चार्ट को रद्दी की तरह फेंका गया है। टूटी अलमारियों में भी चार्ट ठूंसकर भरे गए हैं। विभिन्न छात्र संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई है।
फर्जीवाड़ा छिपाने की आशंका
समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश सचिव रवि यादव का कहना है कि गोपनीय चार्ट के रखरखाव में लापरवाही से आशंका है कि इन्हें नष्ट कराने की साजिश हो रही है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कई फर्जीवाड़ा और घपलों की जांच चल रही है। साक्ष्य मिटाने के लिए साजिश हो सकती है। एसटीएफ इस मामले की जांच करें जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। विद्यार्थी परिषद के विभाग संगठन मंत्री नितिन माहेश्वरी का कहना है कि गोपनीय चार्ट खराब होने से लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल है। ये विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों की लापरवाही है। इसके दोषी लोगों की कार्रवाई करने और इनकी सुरक्षित रखने की मांग के लिए शुक्रवार को आंदोलन भी कर रहे हैं।
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रद्दी की तरह फेंके गए गोपनीय चार्ट
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के जिलाध्यक्ष सतीश सिकरवार का कहना है कि गोपनीय चार्ट सबसे अहम दस्तावेज होता है। इनके रखरखाव में लापरवाही दर्शाती है कि इसमें कोई गहरी साजिश हो सकती है। एनएसयूआई इसके लिए आंदोलन करेगी।
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रद्दी की तरह फेंके गए गोपनीय चार्ट
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सतीश सिकरवार ने कहा कि वे कुलपति से मांग करते हैं कि इनको सुरक्षित रखवाया जाएं और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई करें।
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रद्दी की तरह फेंके गए गोपनीय चार्ट
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प्रभारी कुलपति विश्वविद्यालय प्रो. विनय पाठक ने बताया कि परीक्षा विभाग के गोपनीय चार्ट के खराब होने की जानकारी पर जांच करा रहा हूं। इनके सुरक्षित रखने के लिए लेमिनेशन और डिजिटलाइजेशन भी करा रहे हैं।
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रद्दी की तरह फेंके गए गोपनीय चार्ट
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बता दें डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कई फर्जीवाड़ा और घपलों की जांच चल रही है। इन मामलों में गोपनीय चार्ट की अहम भूमिका है, क्योंकि सारी जानकारी यहां से ही जुटाई जाती है। ऐसे में चार्टों का ये हाल हैरान कर देने वाला है।