आगरा जिले के बाह और पिनाटह क्षेत्र में चंबल नदी का जलस्तर शुक्रवार से घटने लगा है। गुरुवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब छह मीटर ऊपर 135.80 मीटर पहुंच गया था। यह 2.80 मीटर घटकर 133 मीटर के निशान पर आ गया है। नदी का जलस्तर अभी भी लाल निशान 130 मीटर से 3 मीटर ऊपर है। इससे चंबल में बाढ़ का खतरा टला नहीं है। चंबल की बाढ़ से बाह के 38 गांव प्रभावित है। अभी भी आठ गांवों में कोई मदद नहीं पहुंची है।
शुक्रवार को भी गांव मऊ की मढ़ैयां, गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, भगवानपुरा, झरनापुरा, पुरा शिवलाल, पुरा डाल, उमरैठापुरा, क्योरी, डगोरा, रेहा, कछियारा 14 गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूटा रहा। मऊ की मढैयां और उमरेठापुरा को खाली करा लिया गया है। गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गुढ़ा, भगवानपुरा, झरनापुरा गांव में स्टीमर से प्रशासन ने आवाजाही शुरू करा दी है। ग्रामीण टीलों पर रात बिताने को मजबूर हैं।
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चंबल का पानी गांव में घुसा
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बाह के गांव पुराशिवलाल, पुराडाल , डगोरा, कछियारा, रेहा, क्योरी आदि गांव अभी भी मदद की बाट जोह रहे हैं। चंबल नदी का जलस्तर कम होने से डूबा नंदगवां का निर्माणाधीन पुल का हिस्सा भी दिखने लगा है। नदी किनारे के 20 गांवों की गलियों और घरों में अभी भी पानी भरा है। लोग बीहड़ में डेरा डाले हैं।
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पिनाहट घाट पर आईजी नवीन अरोरा
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शुक्रवार शाम को आईजी नवीन अरोरा पिनाहट में चंबल नदी घाट पहुंचे। उन्होंने यहां बाढ़ के हालात का जायजा लिया और अधीनस्थों को राहत-बचाव को लेकर निर्देश दिए। इससे पहले एसडीएम अब्दुल बासित, तहसीलदार राजू कुमार, सीएमओ अरुण कुमार श्रीवास्तव आदि ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। सीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को गांवों में नियमित शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं।
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टीलों पर रहने को मजबूर हुए ग्रामीण
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बारिश में भीगते रहे तंबू के बाहर बच्चे
उमरेठापुरा के जलमग्न होने के बाद गांव की करीब 1500 लोग चंबल के बीहड़ में टीलों पर तंबू लगाकर रह रहे हैं। जिनको शासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे जब तेज बारिश हुई तो इन तंबुओं के बाहर खडे़ बच्चे भीगते रहे। क्योंकि तंबू में सामान रखा हुआ है। उपजिलाधाकारी बाह अब्दुल बासित ने बताया चंबल नदी के जलस्तर का घटना शुरू हो गया है। धीरे-धीरे स्थित सामान्य हो जाएगी।
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यमुना नदी
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दिन में शांत रहीं यमुना की लहरें
उटंगन नदी के शांत होने पर गुरुवार की रात में तीन फीट चढ़ी यमुना की लहरें शुक्रवार को दिनभर शांत रहीं। लोगों को बाढ़ का डर अभी भी सता रहा है। बाह के 35 गांवों में कछार की फसल पहले से डूबी है। गांवों से जुड़ने वाले बीहड़ के रास्ते जलमग्न हो गए हैं।