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आस्था: मथुरा में राजाधिराज के दर्शन से होती है दिन की शुरुआत, चंद्र और सूर्य ग्रहण में भी खुले रहते हैं पट
Thu, 08 Dec 2022 03:24 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
पवन मित्तल, मथुरा
पवन मित्तल, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 08 Dec 2022 03:24 PM IST
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राजाधिराज द्वारिकाधीश
- फोटो : अमर उजाला
यूं तो मथुरा-वृंदावन धार्मिक नगरी है। यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष आराध्य की एक झलक पाने के लिए आते हैं, लेकिन मथुरा शहर की बात कुछ हटके है। यहां के अधिसंख्य लोगों की दिनचर्या राजाधिराज द्वारिकाधीश के दर्शन और उनकी मंगला आरती के साथ होती है। दर्शन-पूजन के बाद यमुना मइया का दीदार करना भी ये लोग नहीं भूलते हैं। इसके बाद अपने-अपने दैनिक कार्यों में लग जाते हैं। यह क्रम वर्षों से चला आ रहा है।
द्वारिकाधीश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
इस मंगला आरती का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि सुबह-सुबह शहरवासी अपने दिन की शुरुआत राजाधिराज के दर्शन से करते हैं। ऐसे हजारों श्रद्धालु हैं, जो वर्षों से नियमित मंगला आरती के दर्शन कर रहे हैं। चाहे वह व्यापारी हों, नौकरीपेशा हों, विद्यार्थी हों या फिर महिलाएं। सुबह नहा-धोकर पहुंच जाते हैं मंदिर की चौखट पर और शीश झुकाकर, माथा टेककर हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए।
मंदिर में रुक्मणी माता की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
जैसे ही मंगला आरती शुरू होती है सभी अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर जयघोष करने लगते हैं। अपने ठाकुरजी को रिझाने के लिए कोई भावुक हो कर आंसू बहाता है तो कोई ध्यानमग्न होकर उनकी आराधना में लीन हो जाता है। दर्शन-पूजन के बाद सभी अपने-अपने कार्यों में जुट जाते हैं। कोई अपना प्रतिष्ठित खोलता है तो कोई अपनी ड्यूटी पर जाने की तैयारी में लग जाता है।
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जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
दर्शन के बाद जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता
द्वारिकाधीश मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता करना भी नहीं भूलते हैं। होली गेट से द्वारिकाधीश मंदिर तक और यमुना मइया के किनारे वाले रास्ते पर अनगिनत बेढ़ई-कचौड़ी और जलेबी आदि की दुकानें हैं, जहां सुबह-सुबह नाश्ता करने वालों की भीड़ लगी रहती है। दो-दो कचौड़ी या बेढ़ई और सौ ग्राम जलेबी खाना शायद ही कोई भूल पाए।
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यमुना मइया
- फोटो : अमर उजाला