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अब नहीं कलंदर की छड़ी का डर, मन मोह रहीं भालुओं की अठखेलियों की तस्वीरें
Wed, 05 Jun 2019 12:59 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 05 Jun 2019 12:59 PM IST
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कीठम के भालू संरक्षण गृह में तरबूज का आनंद लेते भालू
- फोटो : अमर उजाला
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कीठम में भालू केंद्र में इन दिनों भालुओं की अठखेलियां मन मोह रही हैं। भीषण गर्मी में कूलर की हवा लेते हैं, वहीं सुहाने मौसम में जंगली पेड़ों के बीच मटरगश्ती करते हैं। कभी पानी के तालाब में भालू खेलते कूदते हैं तो कभी एक दूसरे के साथ खाने पीने की चीजों टूट पड़ते हैं। अब न तो कलंदर की छड़ी का डर है और गर्मी की चिंता।
कीठम के भालू संरक्षण गृह में खाने का आनंद लेते भालू
- फोटो : अमर उजाला
सूर सरोवर स्थित कीठम आगरा भालू संरक्षण केंद्र हैं। यहां करीब सौ भालू हैं। ये वे भालू हैं, जो कभी कलंदर की छड़ी के इशारे पर नाचते और झूमते थे। वहां इनके लिये बंदिश थी, लेकिन जब खुले आसमान के नीचे इन्हें आजादी मिली, तो जीने का आनंद दोगुना हो गया। आज भालू अपनी जंगल की जिंदगी को जीने लगे हैं।
मोनाली नाम का भालू पानी के कुंड में मस्ती करता दिखा
- फोटो : अमर उजाला
गर्मियों में भालुओं के नहाने के लिए कुंड भी बनाए गए हैं। मंगलवार को गर्मी से बेहाल मोनाली नाम का भालू पानी के कुंड में मस्ती करता दिखा। नहाने के बाद भालू अपने कमरों में चले जाते हैं। उनके लिए यहां अलग अलग कमरों में 12 से अधिक कूलर लगाए गए हैं। भालू केंद्र के प्रभारी बैजूराज ने बताया है कि गर्मियों में उनके खाने में भी बदलाव किया गया है। सुबह चने का दलिया और दोपहर को खाने में तरबूज आम जैसे फल दिए जाते हैं। शाम को फल और दलिया जैसी चीजें खाने में दी जाती हैं।
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भालुओं के लिए कमरे, जिसमें लगाया गया कूलर
- फोटो : अमर उजाला
यहां भालुओं के लिय हर प्रकार की सुविधा हैं। इनके घूमने फिरने पर कोई पाबंदी नहीं है। जहां मन करे वहां आ जा सकते हैं। इन भालुओं के लिए कमरे भी बनाये गये हैं, जिसमें कूलर लगाया गया है। इन कमरों में भी इनका फीडिंग यूनिट है, जहां सुबह, दोपहर और रात का भोजन इन्हें दिया जाता है। सुबह के खाने में चार प्रकार के अनाज, सब्जी से बना दलिया इन्हें परोसा जाता है।
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गर्मियों में भालुओं के नहाने के लिए कुंड भी बनाए गए
- फोटो : अमर उजाला
जंगल में इनके लिए खेलने का सामान भी है, जैसे कई जगह फुटबॉल डाले गये हैं। बांस बल्लियों से पुल बनाये गये हैं। जहां पर ये भालू उछलते कूदते हैं। आपस में मस्ती करने वाले इन भालुओं में प्रेम भी है। छोटी मोटी लड़ाई तो होती हैं, लेकिन बडे झगड़े इनके बीच नहीं होते हैं।