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बागपत का महाभारतकालीन सिनौली गांव एएसआई ने किया संरक्षित, उत्खनन में मिले शाही ताबूत, रथ और शस्त्र
Sat, 31 Oct 2020 12:04 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 31 Oct 2020 12:04 AM IST
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सिनोली साइट
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने बागपत के महाभारतकालीन सादिकपुर, सिनौली गांव को संरक्षित किया है। एएसआई आगरा सर्किल ने सादिकपुर को राष्ट्रीय महत्व का पुरातत्वीय स्थल घोषित करने की अंतिम अधिसूचना जारी कर दी है। यह आगरा सर्किल का 267वां संरक्षित स्मारक बन गया।
सिनौली उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
सिनौली में 28.75 हेक्टेयर जमीन संरक्षित स्मारक एवं अवशेष स्थल घोषित की गई है। इस साइट से तीन चरणों के उत्खनन में शाही ताबूत, रथ, महिला का कंकाल, धनुष और तांबे की तलवार समेत कई चीजें सामने आ चुकी हैं।
सिनौली उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने 17 अगस्त से पहले तक सादिकपर सिनौली गांव को संरक्षित करने में आपत्ति मांगी थी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद सिनौली को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया। महाभारतकालीन इस प्राचीन स्थल से मिट्टी की भट्टी, धनुष, मृद भांड और तांबे की तलवार मिल चुकी है।
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सिनौली उत्खनन
- फोटो : अमर उजाला
आगरा सर्किल के एएसआई के अंतर्गत आने वाले बागपत जिले में सिनौली में दो साल तक उत्खनन चला, जिसे अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि प्राचीन स्थल अवशेष सादिकपुर, सिनौली को राष्ट्रीय महत्व का पुरातत्वीय स्थल घोषित करने की अधिसूचना जारी की है। हडप्पाकालीन यह साइट लगभग 3800 साल प्राचीन है।
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उत्खनन में मिले रथ के निशान
- फोटो : अमर उजाला
उत्खनन में मिले शाही ताबूत, रथ और शस्त्र
महाभारतकालीन सिनौली में कराए गए उत्खनन में शाही ताबूत, प्राचीन रथ, महिला का कंकाल, धनुष, और तांबे की तलवार और मृदभांड सामने आ चुके हैं। योद्धा के साथ उसके रथ और शस्त्रों को भी दफना दिया जाता था। वहीं, महिला के कंकाल के पास तांबे का शीशा और हड्डियों से बना कंघा मिला था। अंतिम संस्कार के दौरान इनके पास कंघा और शीशा रखा जाता था। इस काल के लोग भी पुनर्जन्म को मानते थे।
महाभारतकालीन सिनौली में कराए गए उत्खनन में शाही ताबूत, प्राचीन रथ, महिला का कंकाल, धनुष, और तांबे की तलवार और मृदभांड सामने आ चुके हैं। योद्धा के साथ उसके रथ और शस्त्रों को भी दफना दिया जाता था। वहीं, महिला के कंकाल के पास तांबे का शीशा और हड्डियों से बना कंघा मिला था। अंतिम संस्कार के दौरान इनके पास कंघा और शीशा रखा जाता था। इस काल के लोग भी पुनर्जन्म को मानते थे।