भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव बटेश्वर आज भी विकास को तरस रहा है। गांव के जिस मंदिर में उन्होंने पूजा की, जिस स्कूल में ककहरा सीखा, उसकी भी सुध लेने वाला कोई नहीं है। गांव के लोगों को बिजली, पानी और यातायात जैसी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। भाजपा सरकार में बटेश्वर के विकास की घोषणा तो हुई हैं, लेकिन धरातल पर अभी तक नहीं उतरी है।
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पैतृक गांव बटेश्वर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी का घर
16 अगस्त, 2018 में अटल बिहारी वाजपेयी दुनिया से हमेशा के लिए विदा हो गए थे। पहली पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है, लेकिन उनका पैतृक गांव बटेश्वर अपनी बदहाली पर रो रहा है। आगरा शहर से 80 किमी दूर बसा बटेश्वर अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक स्थल होने के साथ बड़ा धार्मिक स्थल भी है। यह गांव स्वतंत्रता आंदोलन के स्वर्णिम इतिहास को समेटे हुए है, लेकिन आज भी विकास को तरस रहा है।
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बटेश्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 सितंबर 2018 को उनकी अस्थि विसर्जन के लिए बटेश्वर आए थे। इस दौरान उन्होंने यहां अटल बिहारी से जुड़ी यादों को सहेजने के साथ ही क्षेत्र के समग्र विकास की घोषणा की थी। जनप्रतिनिधियों के सुझावों पर 10 करोड़ रुपये के प्रस्ताव तैयार किए गए। शासन ने इन्हें मंजूरी दे दी थी, लेकिन विकास कार्य शुरू नहीं हो सके।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
बाह से भाजपा विधायक रानी पक्षालिका सिंह ने बटेश्वर के विकास को लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजा गया था। जिस पर हाल ही में योगी सरकार ने 3.60 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है। जिससे यमुना किनारे 108 शिव मंदिर और शौरीपुर में जैन तीर्थस्थल को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जाना है
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री रहते अटल बिहारी वाजपेयी जब बटेश्वर में आगरा-इटावा रेल परियोजना का शिलान्यास करने आए थे, तब वो जिस अतिथि गृह में रुके थे, उसी के जीर्णोद्धार से बटेश्वर में कार्य शुरू होंगे। बटेश्वर के विकसित होने पर अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मस्थली को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आया करेंगे।