देश को आजाद हुए 74 साल हो गए, बटेश्वर में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुडे़ क्रांति स्थल का संरक्षण नहीं हो सका है। खंडहर में तब्दील हो रही जंगलात कोठी में कंडे पाथे जा रहे हैं, पशु बांधे जा रहे है। उनके घर के आंगन तक को बबूल की झाड़ियों ने घेर लिया है। 1942 में बटेश्वर में रक्षा बंधन के दिन चौक में आल्हा की महफिल सजी थी। महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन से प्रभावित होकर लीलाधर वाजपेयी ने ऐसा क्रांतिकारी भाषण दिया कि करीब 300 देशभक्तों ने बटेश्वर के जंगल में बनी कोठी पर धावा बोल दिया। आजादी के दीवानों ने कोठी को तहस नहस कर राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर खुद को आजाद घोषित कर दिया।
कागजों में दबे रहे सरकार के ‘अटल’ दावे: 1942 में जंगलात कोठी फूंक फहराया था तिरंगा, आज पाथे जा रहे कंडे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 15 Aug 2021 10:01 AM IST
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