अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ में शनिवार रात को सूरसदन प्रेक्षागृह कवि सम्मेलन और मुशायरे के संगम का गवाह बना। देश के नामचीन शायरों और कवियों ने रचनाएं पेश कीं। कभी वीर रस और ओज की कविताएं श्रोताओं की भुजाएं फड़काती रहीं तो कभी ठहाके गूंजने लगते। शृंगार की कविताओं ने युवाओं के जैसे मन की बात की।
तस्वीरें: 'मां तुझे प्रणाम' में कविता-शायरी का संगम, नामचीन शायर व कवियों ने पढ़े कलाम
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kavi sammelan in agra
- फोटो : अमर उजाला
सूरसदन में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का उद्घाटन हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ आरएस पारीक, इंडियन ऑयल के सीनियर मैनेजर मनमोहन खेड़ा, केसी सेठ, एलआईसी के मनोज धवन, जीडी अग्रवाल और कथूरिया फिल्म्स के अमित कथूरिया ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया।
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डीआईजी लव कुमार कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि रहे, जिन्होंने दर्शकों के साथ देर रात तक रचनाओं को सुना। कवि सम्मेलन में सभी कवियों को सम्मानित करने के बाद सरस्वती वंदना आगरा के प्रख्यात कवि शिव सागर ने की। इसके बाद कभी वीर रस और ओज की रचनाएं तो कभी हास्य रस में श्रोता डूबे रहे।
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पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात कवि सुरेंद्र शर्मा, आशीष अनल, दीपक गुप्ता, अशोक चारण, देवदत्त देव (मुंबई) ने अपनी कविताओं से अपने विशिष्ट अंदाज में मुहब्बत की नगरी को नमन किया। शायरों में मुनव्वर राणा, मंजर भोपाली, सबा बलरामपुरी ने अपनी शायरी से लोगों को दीवाना कर दिया। कार्यक्रम के संयोजक हास्य कवि रमेश मुस्कान रहे।
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मुंबई से आए देवदत्त देव ने गुनगुनाया ‘अरमान दिल के सारे, हमने मिटा दिए हैं, सारे गिले शिकवे कब के भुला दिए हैं’। फरीदाबाद से आए दीपक गुप्ता ने बयां किया कि ‘अगर मैं झूठ बोलूं तो मेरा किरदार मरता है, जो बोलूं सच तो फिर भूखा मेरा परिवार मरता है’।