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Agra: ताजनगरी में बंदरों के आतंक की कहानी पहुंची हाईकोर्ट, राज्य सरकार सहित नौ विपक्षियों को जारी हुआ नोटिस

Sun, 24 Jul 2022 06:31 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 24 Jul 2022 06:31 PM IST
सार

ताजनगरी आगरा में बंदरों की समस्या को लेकर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 17 अगस्त तक राज्य सरकार, नगर निगम आगरा सहित नौ विपक्षियों को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है। 
 

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Allahabad High Court cognizance of PIL filed by advocate KC Jain regarding menace of monkeys in Agra
ताजमहल में बंदर - फोटो : Amar Ujala

पर्यटन नगरी आगरा में बंदरों की समस्या से शहरवासी परेशान हैं। बंदर पर्यटकों के साथ ही लोगों को भी हमले करके चोटें पहुंचा रहे हैं। आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन की जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, नगर निगम आगरा सहित नौ विपक्षियों को नोटिस जारी करके 17 अगस्त तक जवाब-तलब किया है।  न्यायमूर्ति प्रतींकर दिवाकर एवं आशुतोष श्रीवास्तव की इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 19 जुलाई को जनहित याचिका का संज्ञान लेते हुए आदेश में कहा है कि बंदरों के खतरे ने आगरा शहर को त्रस्त कर दिया है, जहां पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बंदर समान रूप से परेशान करते पाए जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप निवासियों को गंभीर चोटें और कीमती सामान का नुकसान हो रहा है। कभी-कभी बंदरों के हमले के कारण युवा और वृद्धों की मौत हुई हैं। उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने की। 


 

Allahabad High Court cognizance of PIL filed by advocate KC Jain regarding menace of monkeys in Agra
आगरा में बंदरों को आतंक - फोटो : अमर उजाला

शहर में 30 हजार से ज्यादा बंदर

वरिष्ठ अधिवक्ता जैन एवं समाजसेवी प्रशांत जैन ने याचिका में यह उल्लेख किया कि आगरा शहर में 30,000 से अधिक बंदर हैं, जिनकी संख्या पिछले दशक में काफी तेजी से बढ़ी है और बंदर अब बड़े-बड़े झुंड बनाकर घूमते हैं। बंदरों के आक्रमण व उनके काटने से हजारों लोग घायल हो चुके हैं। ताजमहल में भी पर्यटकों को बंदर शिकार बना रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में बंदर काटे के मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। 
Allahabad High Court cognizance of PIL filed by advocate KC Jain regarding menace of monkeys in Agra
सड़क पर बंदरों का आतंक - फोटो : अमर उजाला

यह हुईं घटनाएं

- नवंबर 2018 में ग्राम रुनकता में बंदर मां की गोद से बच्चे को छीनकर ले गया था, जिससे अबोध बच्चे की मृत्यु हो गई। 
- जुलाई 2019 में माईथान के हरीशंकर गोयल की मृत्यु बंदरों के हमले में हो गई। 
- मार्च 2020 में उस्मान की बंदरों के कारण अपनी छत से गिरकर मौत हो गई। 
- अक्टूबर 2020 में भी दो व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। 
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गली में घूमत बंदरों का झुंड - फोटो : अमर उजाला

बंदर हैं संरक्षित जीव

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के परिशिष्ट-2 की प्रविष्टि 17 ए के अनुसार बंदर वन्य जीव है और संरक्षित हैं। अत: वन विभाग एवं नगर निगम इस समस्या का समाधान खोजने के लिए जिम्मेदार हैं। राज्य सभा में भी आगरा, मथुरा, लखनऊ, वृंदावन आदि शहरों की बंदरों की समस्या को लेकर 7 अप्रैल 2022 को प्रश्न उठा था, जिसमें समस्या को स्वीकार करते हुए यह भी बताया गया था कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा मथुरा एवं हल्द्वानी में मंकी रेस्क्यू सेंटर बनाने की अनुमति प्रदान की जा चुकी है।
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सड़क पर बंदरों का झुंड - फोटो : अमर उजाला

मंकी रेस्क्यू सेंटर की हो स्थापना 

- बंदरों के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति लेते हुए वन क्षेत्र में मंकी रेस्क्यू सेंटर की स्थापना की जाए, 
- जहां पर बंदरों के पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो व गूलर, पाकड़, पीपल, बरगद व दतरंगा आदि फलदार वृक्ष हों।
-बंदरों को सुरक्षित व वैज्ञानिक ढंग से समयबद्ध रूप में इन रेस्क्यू सेंटर में ले जाया जाए। इसके लिए राज्य सरकार व नगर निगम को जिम्मेदारी दी जाए। 
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