आगरा की आवास विकास कॉलोनी में पति-पत्नी और बेटी की आत्महत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं मृतक के पिता का कहना है कि सोनू कभी घर पर बैठकर खाना नहीं चाहता था। मां-बाप पर कभी बोझ नहीं बने, इसके लिए कम उम्र में ही मेहनत करने लगा। उसके कर्म का ही नतीजा था कि उसे अच्छा फल भी मिलता था। हरिद्वार में नौकरी लगी। कम पढ़ा लिखा होने के बावजूद 15 से 20 हजार तक कमाने लगा। मगर, एक हादसे ने उसकी जिंदगी बदल दी थी। वह वजन नहीं उठा पाता था। ज्यादा देर तक काम नहीं कर पाता था। यही वजह थी कि वो आगरा आया तो अच्छी नौकरी नहीं मिली। पांच-छह हजार से ज्यादा कोई देने को तैयार नहीं हुआ। इस कारण वो पूरी तरह टूट गया। तनाव में आकर नौकरी करना भूल गया। आखिर में उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
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पिता रणधीर और भाई
- फोटो : अमर उजाला
बेटे की कहानी बताता हुए पिता रणधीर शर्मा की आंखों में आंसू भर आते हैं। वो एक ही बात करते हैं कि बेटे को नौकरी मिल जाती तो ऐसा कदम उठाने का मजबूर नहीं होता। उसका परिवार खुशी से चल रहा था। गीता भी पढ़ना लिखना नहीं जानती थी। पिता ने बताया कि वह मेहनत मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। दोनों बेटे भी मजदूरी ही करते थे।
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मृतक सोनू का पिता
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पिता ने बताया कि सोनू कम पढ़ा लिखा था। छोटा देवेश भी नहीं पढ़ सका। सोनू ने प्रेम विवाह किया था। घर से जाकर बहू के साथ रहने लगा था। उसने कभी कोई मांग नहीं थी। अपने दोनों बच्चों को पढ़ा लिखाकर अच्छा बनाना चाहता था। हादसे की वजह से उसे नौकर नहीं मिल पाई थी। बाद में उसने नौकरी के लिए प्रयास करना बंद कर दिया। मां-बाप के ऊपर बोझ बनने से वो और उसकी पत्नी परेशान थे। परिवार के लोग आत्महत्या के पीछे अब यही वजह मान रहे हैं।
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बेटे-बहू और नातिन की मौत पर बिलखती मां
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पूछने बहुत आए, मदद किसी ने नहीं की
पिता रणधीर शर्मा ने कहा कि तहसील की टीम आई थी। पहले पूछा कि कब, कैसे, क्या हुआ। बाद में कहा कि पुलिस कार्रवाई पूरी हो जाए तो बता देना। इसके बाद कुछ मदद दिलवा देंगे। उनके अलावा भी कुछ लोग आए। उन्होंने यही कहा कि श्याम की शिक्षा के लिए प्रयास करेंगे। उसकी पढ़ाई बाधित नहीं होने देंगे। मगर, किसी ने अब तक मदद नहीं की है।
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सोनू का बेटा और उसकी मां
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श्याम करेगा पढ़ाई, पूरा करेगा सपना
दादा रणधीर शर्मा और दादी कांता देवी को श्याम की चिंता सता रही है। वह अभी दस साल का है। पिता सोनू उसे पढ़ाकर बनाना चाहते थे। मगर, श्याम का मन पढ़ाई में कम लगता है। इस पर सोनू उसे डांटा करता था। अब श्याम ने भी ठाना है कि वह पढ़ने जाएगा। पिता का सपना पूरा करेगा। उधर, दादा ने भी सरकारी और विभिन्न संगठनों से मदद की गुहार लगाई है।