आगरा डकैती कांड: पढ़ाई में अव्वल निर्दोष जाना चाहता था ब्रिटेन, पुलिस की मुठभेड़ में मारा गया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 19 Jul 2021 12:04 AM IST
मुठभेड़ में मारा गया निर्दोष
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आगरा में शनिवार को मणप्पुरम गोल्ड डकैती कांड के बाद एत्मादपुर में पुलिस की मुठभेड़ में मारा गया आरोपी निर्दोष (29) ब्रिटेन जाना चाहता था। फिरोजाबाद के रसीदपुर कनेठा निवासी निर्दोष पढ़ाई में तेज था। उसके पिता माता प्रसाद और भाई सोनू के मुताबिक, निर्दोष ने हाईस्कूल से लेकर बीएससी तक प्रथम श्रेणी में पास की थी। इसके बाद वह चेन्नई चला गया। यहां पर सीएफटीआई से फुटवियर डिजायनिंग का कोर्स किया। दो साल तक नोएडा और देहरादून की कंपनी में नौकरी की।

वह दो साल पहले मुंबई गया था। मर्चेंट नेवी की तैयारी की। इस पर उसका चयन हो गया। उसे अप्रैल में ब्रिटेन जाना था। इसके लिए सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली थी। मार्च में मुंबई भी गया था। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोरोना की दूसरी लहर से वह ब्रिटेन नहीं जा सका था। निर्दोष का वीजा नहीं बन सका। अब अगस्त की तारीख मिली थी। मगर, इससे पहले ही परिवर को उसके मुठभेड़ में मारे जाने की जानकारी मिली। 
पोस्टमार्टम हाउस पर निर्दोष के परिजन
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मृतक निर्दोष के भाई सोनू ने बताया कि निर्दोष तीन महीने पहले घर से गया था। इसके बाद फोन पर ही बात करता था। दस दिन पहले आगरा आने के लिए कहा था। गुरुवार को कॉल किया। रिसीव नहीं किया। मैसेज करके बताया कि कल आएगा। वह कैसे लुटेरों के साथ पहुंचा, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है।
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मृतक निर्दोष का भाई सोनू (बायें)
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सदमे में परिवार 
भाई सोनू ने बताया कि निर्दोष की शादी नहीं हुई थी। पांच बहनों की शादी हो चुकी है। पिता खेती करते हैं। सोनू एक कंपनी में काम करता है। तीन महीने पहले नए घर का प्रवेश कराया था। तब निर्दोष घर पर ही था। इसके बाद चला गया। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह कैसे बदमाशों तक पहुंचा किसी को पता नहीं है। इससे परिवार सदमे में है। रात तकरीबन साढ़े नौ बजे गांव के प्रधान देवेंद्र ने उन्हें घटना की जानकारी दी थी। पुलिस भी आई। तब बेटे के मरने के बारे में पता चला।
निर्दोष के पिता माता प्रसाद
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बेटे की पढ़ाई में बिका मकान और दुकानें
पिता माता प्रसाद ने बताया कि बेटा निर्दोष पढ़ाई में काफी तेज था। उसके दसवीं में 70 प्रतिशत, इंटरमीडिएट में 74, बीएससी में 62 फीसदी अंक आए थे। वह नोएडा में नौकरी करने गया था। उसने यही बताया कि वह मार्केटिंग का काम करता है। बेटे को पढ़ाने के लिए अपना घर और तीन दुकान तक बेच दी थीं। 
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आगरा में डकैती के बाद हुई थी मुठभेड़
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आगरा में पुलिस की मुठभेड़ में मारे गए निर्दोष को परिजन बेगुनाह बता रहे हैं। हालांकि क्षेत्रीय लोगों के अनुसार निर्दोष शुरू से ही शातिर दिमाग का था। वह परीक्षाओं में कई बार ‘मुन्नाभाई’ की भूमिका निभा चुका था। बोर्ड परीक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी वह पेपर देता था। इसके लिए वह हजारों रुपये लेता था। लढ़ूपुरा निवासी एक युवक से उसने हजारों रुपये लिए थे। 
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