ढाई साल का मयंक घर के बाहर खेल रहा था, तभी वृंदावन का मौसिम आया और उसे उठाकर ले गया। पुलिस की मानें तो आरोपी काफी शातिर है। वो मयंक को बेचने की तैयारी कर चुका था। इसमें उसने अपने मित्र को भी मिला लिया था। वृंदावन में उसके घर पर ही बच्चे को दे आया था। मगर, परिवार के साथ 50 से अधिक लोग तलाश में लगे। पुलिस की 10 टीमें बनाई गईं।
सीसीटीवी से मिला सुराग
सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से सुराग मिला और पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। 24 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चा बरामद हुआ तो सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। आईजी नचिकेता झा ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया। परिवार वाले भी पुलिस को धन्यवाद देते हुए नहीं थक रहे।
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पुलिस हिरासत में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार शाम को 5:30 बजे ढाई साल का मयंक का अपहरण हुआ था। मां मिथलेश बेटे के नहीं मिलने से रोए जा रही थी। परिवार का हर व्यक्ति यही चिंता में था कि आखिर मयंक कब लौट कर आएगा। मां और दादी कांता देवी ने खाना-पीना तक छोड़ दिया। मिथिलेश ने बताया कि उन्होंने देवी मां के सामने जोत जलाई थी। उनसे प्रार्थना की थी कि किसी तरह बेटे को वापस ला दे। उनकी गोद खाली नहीं कर देना। वह मंदिर के बाहर ही बैठ गई।
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आरोपी को पकड़कर ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
उन्हें आस थी कि देवी मां उनकी प्रार्थना को सुन लेंगी। बुधवार आधी रात को जब बेटे के मिलने के बारे में पता चला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पहले उन्हें विश्वास नहीं हुआ। बाद में देवर राहुल ने उन्हें वीडियो कॉल करके मयंक को दिखाया।
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मयंक को देख छाई खुशी
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बृहस्पतिवार सुबह 7:00 बजे वह उसे लेकर आए। मां ने बेटे को गले से लगा लिया। कभी माथा चूमा तो कभी हाथ। गोद में आने के बाद मयंक मां से दूर नहीं जा रहा था। उसने पिता का मोबाइल ले लिया और वीडियो देखने लगा।
पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता के दौरान भी मां की गोद में खेल रहा था। मां भी उसे लिए हुए खुश थी। उन्होंने सभी का धन्यवाद दिया। पुलिस के कार्य की सराहना की।