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Agra: कैद की जंजीरों से आजाद हुई 39 साल की हथिनी 'रोजी' पहुंची अस्पताल, जख्म बयां कर रहे दर्द की कहानी

Tue, 05 Jul 2022 01:47 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 05 Jul 2022 01:47 PM IST
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39-year-old elephant Rosie freed from chains reached mathura hospital
39 साल की हथिनी 'रोजी' पहुंची अस्पताल - फोटो : Wildlife SOS
उत्तर प्रदेश के भदोही वन विभाग द्वारा राज्य की सीमा पर अवैध रूप से ले जाई जा रही 39 वर्षीय भीख मांगने वाली हथिनी 'रोजी' को जब्त किया गया था। हथिनी के शरीर पर भारी और नुकीली जंजीरें थीं। वर्षों की उपेक्षा और पशु चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण उसको गंभीर बीमारियां हैं। रोजी को अवैध रूप से रखने वाले उसके मालिकों द्वारा तमाम कानूनी बाधाओं के बावजूद, उसे वाइल्डलाइफ एसओएस के मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में लाया गया, जहां रोज़ी को विशेष चिकित्सा उपचार और पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है।


वन विभाग ने इस महीने की शुरुआत में वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस से मिली खुफिया जानकारी के बाद भदोही में हथिनी को जब्त किया था। रोजी के मालिक बारातों और भीख मांगने के लिए अवैध रूप से उसका इस्तमाल करते थे, जिसके कारण उसने अपना अधिकांश जीवन कष्टदायी दर्द में बिताया। उसके आगे और पीछे के पैरों के चारों ओर दर्दनाक नुकीली जंजीरें भी बंधी हुईं थीं।
 
39-year-old elephant Rosie freed from chains reached mathura hospital
हथिनी रोजी - फोटो : Wildlife SOS
रोज़ी को वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी अस्पताल में लाने से रोकने के लिए उसके मालिकों ने तमाम बाधाएं उत्पन करने की कोशिश की, जिसके कारण काफी विलंब भी हुआ। पिछले हफ्ते, अदालत से रोजी के पुनर्वास की अनुमति मिलते ही वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों और हाथी देखभाल कर्मचारियों की एक टीम विशेष हाथी एम्बुलेंस के साथ भदोही, उत्तर प्रदेश पहुंची और उत्तर प्रदेश वन विभाग की सहायता से हथिनी को सकुशल मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी अस्पताल ले आई।
39-year-old elephant Rosie freed from chains reached mathura hospital
हेल्थ कार्ड - फोटो : Wildlife SOS
संस्था के पशु चिकित्सकों द्वारा किये गए गहन चिकित्सा जांच से पता चला कि हथिनी लगभग 39 साल की है और पक्की सड़कों एवं अन्य अनुपयुक्त सतहों पर चलने के परिणामस्वरूप उसके पैरों के तलवे और नाखून कटी -फटी हालत में है। इसके अतिरिक्त, उसके शरीर पर कई दर्दनाक फोड़े और चोटें भी हैं। यात्रा के दौरान रोज़ी को दर्द से तत्काल राहत प्रदान करने के लिए पशु चिकित्सकों की टीम अपने साथ चिकित्सा उपकरण भी लेकर गई थी।
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39-year-old elephant Rosie freed from chains reached mathura hospital
हथिनी रोजी - फोटो : अमर उजाला
तमाम चुनोतियों के बावजूद, रोज़ी को आखिरकार अपने कष्ट भरे जीवन से आज़ादी मिली और उसे वाइल्डलाइफ़ एसओएस की एक्सपर्ट देखरेख में लाया गया। रोज़ी को उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा स्थापित भारत के पहले और एकमात्र हाथी अस्पताल परिसर में विशेषज्ञों के हाथों लेजर थेरेपी, डिजिटल वायरलेस रेडियोलॉजी और थर्मल इमेजिंग जैसी विशेष चिकित्सा सुविधायें मिलेंगी।
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39-year-old elephant Rosie freed from chains reached mathura hospital
हथिनी के पैरों में पड़ी जंजीर - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ. इलियाराजा ने बताया कि 'वर्षों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार ने रोज़ी के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। उसके पैर बहुत खराब स्थिति में हैं और उसके शरीर पर कई चोटों के निशान भी हैं। हम उसके स्वास्थ्य की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने और उसे आवश्यक देखभाल प्रदान करने के लिए विस्तृत चिकित्सा जांच कर रहे हैं।'
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