विश्व धरोहर रेल मार्ग से अब कालका से शिमला पहुंचने में मात्र चार घंटे लगेंगे। 96 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक पर रेलगाड़ियां जल्द ही 25 के बजाय 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी।
दो तरह के ट्रायल के बाद रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) लखनऊ की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य रेल सुरक्षा आयुक्त ने गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इससे सैलानियों के समय की बचत होगी।
विस्ताडोम और रेस्टोरेंट कोच रेल गाड़ियां भी इसी रफ्तार से चलेंगी। बता दें कि अभी कालका से शिमला पहुंचने में साढ़े पांच घंटे लगते हैं। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के आदेशों पर उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल की ओर से आरडीएसओ की निगरानी में पहले दिसंबर और फिर फरवरी माह में रफ्तार बढ़ाने के लिए ट्रायल हुए।
ट्रायल के दौरान इंजन और कोच में कंपन, ब्रेकिंग सिस्टम को बारीकि से जांचा गया। शिमला और शोघी के बीच इंजन और कोच में सेंसर, स्पीडोमीटर और कंट्रोलर लगा कर किए गए ट्रायल कामयाब रहे। आरडीएसओ ने इसकी रिपोर्ट मुख्य रेल सुरक्षा आयुक्त को भेज दी है।
शिमला-कालका रेलवे ट्रैक पर 102 सुरंगें और सैकड़ों घुमावदार मोड़ हैं। कई जगहों पर तो 48 डिग्री के तीव्र घुमाव भी हैं, इसलिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखने के बाद मुख्य रेल सुरक्षा आयुक्त ने गाड़ियों की स्पीड 30 किलोमीटर प्रतिघंटा करने की मंजूरी दी है।