66 वर्षीय इस शख्स की कहानी जानकर आप भी सलाम करेंगे। लामा छुटलिन छोंजोर ने ऐसा कारनामा किया है कि आने वाली कई पीढ़ियां याद रखेंगी। जिस काम को करने में सरकार ने भी हाथ पीछे खींच लिए उसे इस शख्स ने अकेले अपने दम पर कर दिखाया। आइए जानते हैं-
समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर पिछले पांच सालों से पहाड़ों को भेदकर सड़क बनाने में जुटे बौद्ध भिक्षु 66 वर्षीय लामा छुटलिन छोंजोर की मेहनत आखिर रंग लाई है। उन्होंने अपने जीवन भर की पूंजी और चंदे से 26 किलोमीटर लंबी सड़क बना दी है। छुटलिन ने अकेले पहाड़ काटकर गांव तक सड़क पहुंचा दी।
दारचा से शिंकुला दर्रा होकर गुजरने वाली इस सड़क को जम्मू कश्मीर के कारगिल जिला के उपमंडल जंसकर के पहले गांव करग्या तक बनाया गया है। शुक्रवार को पहली बार लामा छोंजोर जीप लेकर करग्या गांव पहुंचे। यहां पहुंचने से लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है।
जम्मू कश्मीर की ओर से हिमांक प्रोजेक्ट निर्माण कार्य को अंजाम दे रहा है। हालांकि अभी 25 किलोमीटर सड़क और बनना बाकी है। इस मार्ग से मनाली-कारगिल की दूरी भी करीब 300 किलोमीटर कम हो जाएगी। पांच साल पहले लामा छुटलिन छोंजोर ने शिंकुला दर्रा से करग्या गांव की ओर सड़क निर्माण का काम शुरू किया था। एक साल पहले ही इस काम के लिए नेशनल एसटी कमीशन लामा छोंजोर को सम्मानित भी कर चुका है।
हालांकि, दारचा-शिंकुला-पदुम सड़क के निर्माण का जिम्मा सीमा सड़क संगठन के दीपक विंग के पास है। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण लामा छोंजोर ने खुद ही सड़क निर्माण का जिम्मा उठाया।