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मिलिए नन्ही पर्यावरणविद कल्पना से, इन्होंने पेड़ों को बनाया है भाई, हर साल बांधती हैं राखी

Tue, 05 Mar 2019 05:28 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Tue, 05 Mar 2019 05:28 PM IST
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international women day: kalpana thakur of himachal tied rakhi to tree

देश और प्रदेश में हर साल बहन अपने भाई को राखी बांधकर पवित्र त्योहार रक्षाबंधन को मनाते हैं। वहीं, हिमाचल के लाहौल की नन्ही पर्यावरणविद कल्पना ठाकुर ने बचपन से ही पेड़ों को अपना भाई बना लिया है।

international women day: kalpana thakur of himachal tied rakhi to tree
कल्पना हर साल रक्षाबंधन पर न सिर्फ पेड़ों को राखी बांधती हैं, बल्कि उनकी देखभाल भी करती हैं। लाहौल-स्पीति के मूलिंग निवासी 14 वर्षीय कल्पना ठाकुर की ओर से रोपे गए पौधे अब वृक्ष का आकार लेने लगे हैं। 
international women day: kalpana thakur of himachal tied rakhi to tree

कल्पना ने 18000 फीट ऊंची मूलिंग पीक, 18870 फीट ऊंची खारदुंगला पीक को फतह कर पर्यावरण और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया है।

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कल्पना की इस मुहिम की हर ओर सराहना हो रही है। कल्पना ठाकुर को राष्ट्रीय एकात्मकता पुरस्कार से नवाजा गया है। रक्षाबंधन पर पेड़ों का राखी बांध पर्यावरण बचाने का संदेश देने वाली कल्पना को हिमोत्कर्ष साहित्य संस्कृति एवं जनकल्याण परिषद की ओर से  पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर यह पुरस्कार दिया गया है।
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कल्पना ठाकुर के पिता ग्रीन मैन के अवार्ड से सम्मानित पर्यावरणविद किशन लाल ने कहा कि पुरस्कार पाकर उनकी बेटी ने लाहौल घाटी का मान बढ़ाया है। पर्यावरण बचाने की दिशा में उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा। 

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