10वीं की परीक्षा में बेटियों का दबदबा कायम है। बड़े सपने लिए ये होनहार मेहनत से अपनी मंजिल छूना चाहते हैं। आइए जानते हैं इनके सपने..
हिमाचल में 10वीं की परीक्षा में छाई बेटियां, पढ़िए क्या हैं इनके सपने
दसवीं में पहले स्थान पर रहीं अक्षिमा ठाकुर हृदयरोग विशेषज्ञ बनना चाहती हैं। प्रदेश शिक्षा बोर्ड के परिणाम में 700 में से 690 अंक लिए हैं। अक्षिमा ने बताया कि उनका उद्देश्य बड़े होकर गरीबों तथा जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है। एक डॉक्टर बनकर अपना सपना पूरा करना चाहती हैं। उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और प्रधानाचार्य संजय चंदेल को दिया है। कहा कि वह दिन में करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती हैं। खाली समय में अपनी मां के साथ रसोई में हाथ बंटाती हैं। उन्हें गायन और नृत्य का भी शौक है। अक्षिमा के पिता जीव विज्ञान प्रवक्ता सुरेश कुमार ने बताया कि यह एक होनहार छात्रा है। अक्षिमा की मां नीलम कुमारी भी अध्यापिका हैं।
दसवीं कक्षा की मैरिट सूची में दूसरे स्थान पर रही लकिता खिदटा का लक्ष्य आईएएस बनना है। अराधना पब्लिक स्कूल रोहड़ू से दसवीं करने के बाद लकिता मनेरवा पब्लिक स्कूल धुमारवी में शिक्षा प्राप्त कर रही है। लकिता ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने दादा चेत राम खिदटा, दादी शंकर देवी, पिता राम प्रकाश खिदटा तथा माता संधीरा खिदटा को दिया है।
दूसरा स्थान हासिल करने वाली चंबा के होली हिमालयन पब्लिक स्कूल की छात्रा ईरा शर्मा आगे चलकर प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती हैं। ईरा ने इस उपलब्धि के लिए जी तोड़ मेहनत की है। ईरा की इस सफलता में उसके माता-पिता ने भी खूब उसका साथ दिया। ईरा का कहना है कि समाज सेवा और राष्ट्रसेवा का धर्म प्रशासनिक अधिकारी के रूप में बखूबी निभाया जा सकता है। ईरा के पिता संजय शर्मा सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग में कनिष्ठ अभियंता के पद पर तैनात हैं। जबकि माता वंदना शर्मा गृहणी हैं। ईरा ने बताया कि उसके परिजन हमेशा आगे बढ़ने और पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते रहे हैं।
जवाली के कुठेड़ा में हेयर ड्रेसर का काम करने वाले सतपाल की बेटी ने दसवीं की मेरिट में तीसरा स्थान पाया है। सतपाल की बेटी विशाली लिटल फ्लावर पब्लिक स्कूल दुराना में पढ़ रही हैं। उन्होंने दसवीं में 700 में से 687 (98.14) अंक लेकर प्रदेश में तीसरा स्थान पाया है। विशाली के पिता कुठेड़ गांव में बारबर की दुकान चलाते हैं। माता सुनीता देवी गृहिणी हैं। पिता सतपाल ने बताया कि वह अपनी तीन बहनों में सबसे बड़ी है। विशाली ने अपनी इस सफलता का श्रेय प्रधानाचार्य राकेश कुमार सहित अध्यापकों और माता-पिता को दिया है।