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Exclusive: अमर उजाला के हाथ लगी फॉरेस्ट गार्ड की डायरी, चौंका देने वाले खुलासे

Wed, 14 Jun 2017 02:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 14 Jun 2017 02:23 PM IST
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forest guard murder case diary reveals about mafia

फारेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत की गुत्थी को पुलिस जितना सुलझाने की कोशिश कर रही है, वह उतनी ही उलझती जा रही है। शुरू में हत्या का मामला दर्ज करने वाली पुलिस ने जांच आगे बढ़ने पर इसे आत्महत्या में तब्दील कर लिया। धाराओं के सपोर्ट में होशियार के हाथों से लिखे कुछ नोट्स और एक चिट्ठी भी बरामद कर मीडिया के सामने रख दी। पुलिस की इन दलीलों से एक बार जरूर यह यकीन होता है कि विभागीय प्रताड़ना के चलते होशियार ने सुसाइड कर लिया लेकिन खुद पुलिस के पास भी इस बात का जवाब नहीं है आखिर आत्महत्या करने वाले होशियार की लाश पेड़ पर उल्टी कैसे लटकी मिली।

forest guard murder case diary reveals about mafia

आत्महत्या की थ्योरी को सपोर्ट करने के लिए पुलिस के पास होशियार के पत्र, जहर की दो शीशियां और उल्टी के नमूने हैं। लेकिन इससे ये जवाब अभी भी नहीं मिलता कि आखिर फारेस्ट गार्ड पेड़ पर क्यों चढ़ा था? उसके दोनों हाथों पर भी छिलने के निशान क्यों थे? ये वही सवाल है जिनका जवाब पुलिस की किसी थ्योरी में नहीं है और जिसकी वजह से कोई भी अब भी इसे आत्महत्या मानने को तैयार नहीं है। पुलिस होशियार की डायरी और मिले पत्र के आधार पर मामले को आत्महत्या बता रही है लेकिन उसकी लिखावट, डायरी के पन्नों पर पुरानी तारीख और हिन्दी अंग्रेजी भाषा के इस्तेमाल खुद में जांच का विषय है। 

forest guard murder case diary reveals about mafia

लेकिन पुलिस ने बिना इन तकनीकी पहलुओं पर जांच पूरी किए मामले को हत्या से आत्महत्या में तब्दील कर दिया। शुरू से ही पुलिस की तफ्तीश में कई कमियां थी। पहले तो मौका ए वारदात के आसपास के इलाके को अगर पुलिस खुद अच्छी तरह पड़ताल करती तो जहर की शीशियां और वह बैग जिसमें होशियार की एक डायरी रखी थी, वह पहले मिल जाती। इसके अलावा हत्या का मामला दर्ज करने के बाद जांच में पुलिस को जैसे जैसे सुराग मिलते गए, बिना वैज्ञानिक प्रमाणिकता के उन सुरागों के आधार पर पुलिस अपनी जांच का रुख बदलती चली गई। 

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यही वजह है कि अब पुलिस की विश्वसनीयता और जांच खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जांच के पांच दिन बाद होशियार की मौत हत्या से आत्महत्या में तब्दील हो गई लेकिन वह पेड़ पर क्यों चढ़ा और उसकी लाश पेड़ पर उल्टी क्यों लटकी मिली, इसका जवाब अब तक किसी के पास नहीं है। जंगल के रक्षक बन गए वन के भक्षक- जिम्मेदार लोगों के नाम उसकी चिट्ठी में साफ पढ़े जा सकते है। होशियार मरने से पहले जो लिखकर छोड़ गया, उसने वन विभाग के पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर दिये हैं। होशियार का विभागीय भ्रष्टाचार पर यह ‘हलफनामा’ चौंकाने वाला है। महकमे की एक फारेस्ट बीट में सरकारी तंत्र वन माफिया के जाल में फंसा दिख रहा है तो पूरे वन क्षेत्र का हाल क्या होगा?

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यह जांच का विषय है। जांच होशियार की मौत की ही नहीं बल्कि कारणों की भी होनी चाहिए। गार्ड के पत्र से तंत्र के सर्वोच्च पद पर बैठी अफसरशाही जगे तो शायद किसी दूसरे होशियार की जान माफिया से बचाई जा सके। होशियार सिंह की डायरी के साथ उसके लिखे एक पत्र की माने तो वह वन माफिया के साथ वन विभाग के अन्य कर्मचारियों के मकड़जाल में उलझ कर दम तोड़ गया। डायरी के तीसरे और पन्ने पर बीओ तेज राम वर्मा पर संगीन आरोप लगाए हैं। उसके पत्र में अवैध तरीके से कैसे पेड़ काटने वालों की सरकारी तंत्र में मजबूत जड़ों का उल्लेख है।

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