स्वाइन फ्लू यानी संक्रामक रोग। प्रदेश में तेजी से फैल रहे इस रोग से लोगों में दहशत का माहौल है। इसकी चपेट में आने से प्रदेश में 16 लोगों की मौत और कई पॉजिटिव रिपोर्ट आने से स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है। समय पर उपचार के बाद इस रोग से निजात मिल सकती है।
पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में रहने वाले लोगों के भी इस रोग की चपेट में आने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। सावधानी ही रोग की रोकथाम का सबसे बड़ा हथियार है।
डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीडी शर्मा ने बताया कि मरीज में बुखार व खांसी-जुकाम आदि के लक्षण आते ही तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें। लोग स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित होते हैं तो उनके लक्षण आमतौर पर मौसमी इंफ्लूएंजा के लोगों के समान ही होते हैं।
इंफ्लूएंजा ए (एच1एन1) से संक्रमित लोगों के जरिये यह हवा में तेजी से फैलने वाली बीमारी है। यह वायरस मौसमी फ्लू के समान फैलता है। इस रोग की ए, बी और सी तीन श्रेणियां हैं। तीसरी श्रेणी के रोगी को अस्पताल में टेस्ट व उपचार शुरू कर देना चाहिए।
ये हैं लक्षण
डॉ. डीडी शर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू एक तीव्र संक्रामक रोग है, जो एक विशिष्ट प्रकार के इंफ्लूएंजा वायरस से होता है। प्रभावित व्यक्ति में सामान्य रूप से मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे ही लक्षण होते हैं।
- नाक से पानी बहना या नाक बंद हो जाना।
- बुखार, गले में खराश, सर्दी-खांसी।
- सिरदर्द, शरीर दर्द, थकान, ठंड लगना, पेटदर्द।
- कभी-कभी दस्त-उल्टी आना आदि