गुमनामी बाबा के रहस्य से जल्द पर्दा उठने की उम्मीद है। फैजाबाद पहुंचे जांच आयोग के अध्यक्ष रि. जज विष्णु सहाय ने बताया, राज्यपाल चाहते थे कि गुमनामी बाबा के बारे में निष्पक्ष पड़ताल हो। उन्होंने कहा, मैंने कोई पुरानी रिपोर्ट नहीं पढ़ी है। अगर मैं मुखर्जी आयोग की या कोई और पुरानी रिपोर्ट पढ़ूंगा तो खुले दिमाग से जांच नहीं कर पाऊंगा।
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अयोध्या पहुंचा जांच दल
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आयोग के सचिव दीपक श्रीवास्तव के साथ सर्किट हाउस पहुंचे सहाय ने कहा कि मेरी जांच का बिंदु सिर्फ ये होगा कि गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी कौन थे।
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विष्णु सहाय
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विष्णु सहाय ने कहा, फैजाबाद कैंप कार्यलय में सुबूत रिकॉर्ड किए जाएंगे, सरसरी तौर पर संग्रहालय का सामान देखेंगे और गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
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गुमनामी बाबा का फाइल फोटो
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बता दें कि नेताजी की मौत की जांच के लिए गठित मुखर्जी आयोग ने भी गुमनामी बाबा के सुभाष चंद्र बोस होने का संकेत दिया था। लेखक व शोधकर्ता अनुज धर ने भी अपनी किताब में गुमनामी बाबा के नेता जी होने का दावा किया था।
कौन थे गुमनामी बाबा: गुमनामी बाबा फैजाबाद के रामभवन में रहते थे। 16 सितंबर 1985 को उनका निधन हो गया। कई लोगों का मानना है कि रामभवन में रहने वाले गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे, जो पहचान छिपाकर वहां रहते थे। हालांकि, वह हमेशा लोगों से दूरी बनाए रखते थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि नेताजी के रिश्तेदार अक्सर यहां उनसे मिलने आते थे। बाबा की मृत्यु के बाद उनकी भतीजी ललिता बोस भी 1986 में फैजाबाद आईं थीं। चश्मदीदों के अनुसार गुमनामी बाबा के सामान देखकर उन्होंने कहा था कि यह कोई और नहीं बल्कि नेताजी ही थे।