रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर अब केवल भव्य स्थापत्य का प्रतीक नहीं रहेगा, बल्कि श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ यह सशक्त आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र भी बनेगा। इसकी स्थापना से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलग तरह की मानसिक शांति व ऊर्जा की अनुभूति होगी। इससे उनका जुड़ाव और गहरा होगा।
राम मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के कारण देश-विदेश में पहचान बना चुका है। इसकी बनावट बहुत ही खास और पारंपरिक है। इसमें प्राचीन भारतीय वास्तुकला शैली का इस्तेमाल हुआ है। इसकी नक्काशी, स्तंभ, शिखर और संरचना आदि पूरे विश्व में भव्यता के उदाहरण के रूप में पेश किए जा रहे हैं।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
इसे कला और इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने के रूप में भी देखा जाता है। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना करके इसे एक नई आध्यात्मिक ऊंचाई देने की कोशिश की है, जो अपने आप में अति विशिष्ट है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
ऊर्जा को सक्रिय और संतुलित करते हैं यंत्र
मान्यताओं के अनुसार किसी भी पवित्र स्थल पर यंत्र की स्थापना उस स्थान की ऊर्जा को सक्रिय और संतुलित करती है। मान्यता है कि श्रीराम यंत्र भगवान श्रीराम की शक्ति और धर्म का प्रतीक है। इसकी स्थापना से मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अधिक गहन आध्यात्मिक अनुभूति होगी।
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राममंदिर में सजावट का विहंगम दृश्य
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसकी स्थापना के बाद राम मंदिर केवल दार्शनिक स्थल नहीं रहेगा, बल्कि एक ऐसा केंद्र बनेगा, जहां आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहेगा। यह ऊर्जा श्रद्धालुओं के मन, विचार और ध्यान पर सकारात्मक प्रभाव डालने में सहायक होगी।
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श्रीराम यंत्र
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अहम है श्रीराम यंत्र
विशेषज्ञों के अनुसार यंत्रों की ज्यामितीय संरचना और मंत्रों से उत्पन्न ध्वनि तरंगों को ऊर्जा संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से यह केवल धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। माना जा रहा है कि श्रीराम यंत्र की स्थापना आस्था और ऊर्जा विज्ञान के बीच एक सेतु का काम करेगी।