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लखनऊ के इस अस्पताल में गर्भवती को मिलेगा मुफ्त इलाज, नवजात को भी मिलेंगी ये सुविधाएं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 11 Jul 2018 02:22 PM IST
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- फोटो : डेमो
क्वीन मेरी अस्पताल में अब गर्भवती व प्रसूताओं को सभी सुविधाएं मुफ्त मिलेंगी। इसके अलावा नवजात का इलाज भी 30 दिन तक मुफ्त होगा। यह संभव होगा जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम से, जिसे अब क्वीन मेरी में भी लागू कर दिया गया है।अभी तक जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम सिर्फ सरकारी अस्पतालाें में ही लागू था। संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए लागू किए गए इस कार्यक्रम को अब क्वीनमेरी अस्पताल में भी लागू कर दिया गया है। यहां सभी व्यवस्थाएं ऑनलाइन रहेंगी।
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गर्भवती को सिर्फ एक बार पंजीयन कराना होगा। उसे एक कोड जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद वह पूरे प्रसवकाल तक अपना इलाज मुफ्त करा सकेगी। इतना ही नहीं प्रसव के वक्त उसे क्वीनमेरी में भर्ती किया जाएगा। वहीं, यदि ऑपरेशन की जरूरत पड़ी तो यह सुविधा भी मुफ्त ही मिलेगी। इसी तरह सभी दवाएं, रक्त, वाहन आदि की भी सुविधा भी निशुल्क रहेगी।
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अब तक मिलती थीं सिर्फ यह सुविधाएं
क्वीनमेरी अस्पताल में अभी तक प्रसूता को सिर्फ बेड चार्ज नहीं देना होता था। इसके अलावा एएनसी चेकअप, अल्ट्रासाउंड जांच, दवाएं आदि का भुगतान करना पड़ता था। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण इलाके की प्रसूता को 1400 और शहरी को 1000 रुपये मिलते थे। नई व्यवस्था में भी यह पैसा मिलता रहेगा। 275 बेड के क्वीनमेरी अस्पताल में रोजाना 800 से अधिक महिलाओं की ओपीडी होती है। वहीं 40 से अधिक भर्ती होती हैं।इसमें राजधानी के अलावा उन्नाव, हरदोई, सीतापुर समेत प्रदेश भर से गंभीर मरीज आते हैं।
क्वीनमेरी अस्पताल में अभी तक प्रसूता को सिर्फ बेड चार्ज नहीं देना होता था। इसके अलावा एएनसी चेकअप, अल्ट्रासाउंड जांच, दवाएं आदि का भुगतान करना पड़ता था। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण इलाके की प्रसूता को 1400 और शहरी को 1000 रुपये मिलते थे। नई व्यवस्था में भी यह पैसा मिलता रहेगा। 275 बेड के क्वीनमेरी अस्पताल में रोजाना 800 से अधिक महिलाओं की ओपीडी होती है। वहीं 40 से अधिक भर्ती होती हैं।इसमें राजधानी के अलावा उन्नाव, हरदोई, सीतापुर समेत प्रदेश भर से गंभीर मरीज आते हैं।
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- फोटो : डेमो
क्वीनमेरी अस्पताल में अभी 275 बेड हैं। लेकिन यहां भर्ती होने वाली महिलाआें की संख्या 500 से अधिक रहती है। इस योजना के शुरू होने से आसपास के जिलों से भी गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ेगी। ऐसे में चिकित्सकीय व्यवस्था संभालना बड़ी चुनौती होगी। अस्पताल की ओपीडी में तो किसी तरह काम चल जाएगा।
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- फोटो : डेमो
लेकिन प्रसव के बाद भर्ती करने की बड़ी समस्या होगी। ऐसे में एक बेड पर 2 से 3 प्रसूताओं को रखा जाना तय है। इसकी आशंका अस्पताल की चिकित्सा प्रभारी भी जताती हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में बेड बढ़ाने के साथ ही स्टाफ बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा। 2014 से अस्पताल में 100 बेड के विस्तार की योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है।