केस-1
गोमतीनगर के विजय सिंह (40) का ब्लड प्रेशर 200 के आसपास रहने लगा। जांच कराई तो डायबिटीज भी बढ़ी थी। डॉक्टर ने समझाया कि किडनी और आंख खराब हो सकती है। इससे वह घबरा गए। बाद में केजीएमयू के डायबिटीज क्लीनिक में इलाज कराया। चिकित्सकों के अनुसार खानपान और लाइफ स्टाइल में बदलाव किया। इससे उनका बीपी नियंत्रित रहने लगा। डायबिटीज भी सामान्य स्तर पर है। उनकी आंखों की रोशनी और किडनी दोनों दुरुस्त हैं।
केस-2
इंदिरानगर निवासी प्रियंका पांडेय (45) की डायबिटीज का स्तर 150 से अधिक रह रहा था। परिवार के लोगों ने बताया कि इससे हार्ट, किडनी और आंख खराब हो जाएगी। प्रियंका तीन डॉक्टरों से बारी-बारी इलाज कराती रहीं, पर डायबिटीज नियंत्रित नहीं हुई। साथ ही घबराहट में उनका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा रहने लगा। आखिरकार वह एसजीपीजीआई गईं, जहां डॉक्टरों ने दवा देने के साथ उनकी काउंसलिंग की। भरोसा दिया कि डायबिटीज नियंत्रित कर लिया तो किडनी और आंख पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अब वह पूरी तरह से ठीक हैं।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर बढ़े तो घबराएं नहीं, बल्कि इलाज कराएं। डॉक्टरों के बताए अनुसार खानपान और जीवनशैली में बदलाव कर लिया जाए तो डायबिटीज से किडनी, हार्ट और आंख पर होने वाले असर को रोका जा सकता है। दिए गए मामले इसके उदाहरण हैं।
किसी भी उम्र में हो सकती है डायबिटीज
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डायबिटीज
- फोटो : Pixabay
वैसे भी किडनी व आंख पर डायबिटीज का असर करीब 10 साल बाद पड़ता है। मधुमेह का किडनी पर पड़ने वाले असर का अब केजीएमयू की टीम ने नए सिरे से अध्ययन शुरू किया है। केजीएमयू, लोहिया संस्थान और पीजीआई की ओपीडी में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो सालभर में करीब 30 फीसदी मरीज बढ़े हैं। इसके पीछे विशेषज्ञ साफ तौर पर शारीरिक श्रम की कमी, खानपान में मोटे अनाज का इस्तेमाल कम होना बता रहे हैं।
एसजीपीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. सुभाष यादव का कहना है कि डायबिटीज किसी भी उम्र में हो सकती है। इसलिए हर साल एक बार प्रमुख जांचें करानी चाहिए। हालांकि, 40 साल की उम्र के बाद डायबिटीज की गुंजाइश ज्यादा रहती है। ऐसे में साल में कम से कम एक बार इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। यदि खाना खाने के बाद डायबिटीज लेवल 90 से 110 और खाना खाने के बाद 140 से 160 तक है तो घबराने की जरूरत नहीं है। इससे अधिक है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। दवाओं और व्यायाम, पैदल चाल, साइकिल चलाने से यह नियंत्रित हो जाती है। डायबिटीज को लेकर घबराने की नहीं बल्कि इलाज कराने की जरूरत है।
समय-समय पर कराएं शुगर की जांच
एसजीपीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. नारायण प्रसाद का कहना है कि तमाम ऐेसे मरीज आते हैं, जिन्हें पता ही नहीं होता कि उन्हें डायबिटीज है। वहीं, पता चलने के बाद भी करीब 10 साल तक इस पर ध्यान नहीं दें तो किडनी को खतरा बढ़ जाता है। लेवल टू डायबिटीज के 100 मरीजों में करीब 50 को किडनी संबंधी समस्या हो सकती है। इससे बचने को समय-समय पर शुगर की जांच कराएं।
पेट में सूजन, उल्टी हो तो डॉक्टर की सलाह लें। पेशाब की जांच में प्रोटीन या लाल रक्तकण हो, रक्त में ब्लड यूरिया और सीरम क्रिएटिनाइन की जांच करानी चाहिए। मरीज ब्लड प्रेशर और डायबिटीज नियंत्रित कर ले तो किडनी की समस्या नहीं आती।