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बॉर्डर पर बंदूक नहीं गेहूं की बाली: सीमा पर संघर्ष विराम के बाद लहलहाई फसल, सुरक्षाबलों की निगरानी में कटाई का काम शुरू

Wed, 27 Apr 2022 03:45 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हीरानगर (कठुआ)
अमर उजाला नेटवर्क, हीरानगर (कठुआ) Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 27 Apr 2022 03:45 PM IST
सार

तारबंदी के पार बीस वर्ष बाद अपनी मेहनत देख भावुक हुए किसानों ने सुरक्षाबलों की देखरेख में कटाई का काम शुरू कर दिया है। पहले दिन किसानों ने गेहूं के दाने मुट्ठी में लेकर माथे पर लगकार धरती मां का आशीर्वाद लिया। डीसी कठुआ राहुल यादव ने मौके पर पहुंचकर किसानों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने बताया कि 35 किसानों ने कृषि विभाग के सहयोग से 141 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल बोई है। पहले दिन 900 क्विंटल अनाज निकाला गया। 

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Wheat crop growing after ceasefire at Hiranagar border, farmers started harvesting wheat crop
कठुआ में आईबी पर तारबंदी के आगे बीएसएफ की सुरक्षा में फसल की कटाई करती कंबाइन। - फोटो : संवाद

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर संघर्ष विराम के चलते 20 वर्षों बाद तारबंदी के आगे बोई गई गेहूं की कटाई का काम को शुरू हो गया। 20 वर्षों बाद अपने खेतों में की गई मेहनत का फल देखकर किसान भावुक हो गए। गेहूं के दाने मुट्ठी में लेकर माथे से लगाए और धरती मां का आशीर्वाद लिया। दिसंबर में कृषि विभाग की मदद से 35 किसानों ने यहां 141 हेक्टेयर पर गेहूं की बिजाई की। जिला उपायुक्त राहुल यादव ने मौके पर पहुंच फसल की कटाई का काम शुरू कराया। बीएसएफ के पहरे के बीच कंबाइन की मदद से फसल की कटाई की गई। पहले दिन करीब 900 क्विंटल गेहूं निकली गई।

Wheat crop growing after ceasefire at Hiranagar border, farmers started harvesting wheat crop
कठुआ में आईबी पर तारबंदी के आगे बीएसएफ की सुरक्षा में फसल की कटाई करती कंबाइन। - फोटो : संवाद

अगली बार तारबंदी की आगे की लगभग पूरी भूमि पर खेती की जाएगी

उपायुक्त ने कहा तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रेरित हुए किसानों को हर संभव सहायता दी गई और सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्राथमिकता पर दिया गया। आगे भी इसी तरह से यहां के किसानों की प्राथमिकता पर सहायता दी जाएगी। पहले यहां खेती न होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन अब अपने खेतों से निकली फसल को देखकर किसान खुश हैं। कुछ किसानों के सहयोग से यह शुरुआत की गई थी, लेकिन अगली बार तारबंदी की आगे की लगभग पूरी भूमि पर खेती की जाएगी।

इस बार 35 किसानों ने तारबंदी के पार खेती करने की पहल की

डीसी ने कहा कृषि विभाग, बीएसएफ के प्रयासों से और किसानों के सहयोग से तारबंदी के आगे खेती करना संभव हो पाया है। इस बार 35 किसानों ने यहां खेती करने की पहल की, जिसके बाद अब बाकी किसान भी तारबंदी के आगे अपने खेतों में काम करने के लिए प्रेरित हुए हैं। किसानों ने डीसी, कृषि विभाग और बीएसएफ का आभार जताते कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। भविष्य में भी अगर इसी तरह से प्रशासन का सहयोग मिलता रहा तो सभी किसान अपने खेतों में काम जरूर करेंगे। मौके पर कृषि विभाग के जिला अधिकारी विजय उपाध्याय और बीएसएफ के अधिकारी मौजूद रहे।

Wheat crop growing after ceasefire at Hiranagar border, farmers started harvesting wheat crop
कठुआ में आईबी पर तारबंदी के आगे फसल की कटाई के दौरान डीसी राहुल यादव - फोटो : संवाद

पाकिस्तान की गोलाबारी के बाद 2002 में बंद हुई थी खेती

तारबंदी के आगे पहले भी किसान खेती करते थे, लेकिन वर्ष 2002 में पाकिस्तान की ओर से यहां भारी गोलाबारी की गई, जिसके बाद किसानों ने यहां खेती करना छोड़ दी। किसानों को फिर से यहां खेती के लिए प्रेरित करने के लिए जिला प्रशासन को करीब एक वर्ष मशक्कत करनी पड़ी। कई बैठकें प्रशासन, बीएसएफ के अधिकारियों और लोगों के बीच हुईं। किसानों को यहां खेती के लिए बीज और खाद मुफ्त उपलब्ध कराने का वादा किया गया।  

कृषि विभाग ने तारबंदी के आगे की जमीन को खेती लायक बनाया

जिसके बाद चक चंगा के 35 किसानों ने खेती करने के लिए अपने नाम दर्ज कराए। कृषि विभाग ने तारबंदी के आगे की जमीन को खेती लायक बनाया। किसानों ने खुद खेतों में जाकर गेहूं की बुआई की। यहां खेती करने के लिए आगे आए किसानों को कृषि विभाग की ओर से सब्सिडी पर ट्रैक्टर और अन्य उपकरण भी मुहैया कराए गए।

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कठुआ में आईबी पर तारबंदी के आगे बीएसएफ की सुरक्षा में फसल की कटाई करती कंबाइन। - फोटो : संवाद

इस बार 1100 क्विंटल गेहूं निकलने की उम्मीद

जिला मुख्य कृषि अधिकारी विजय उपाध्याय ने बताया कि तारबंदी के आगे 12 सौ हेक्टेयर कुल जमीन है। शुरुआत में चक चंगा से की गई यहां 35 किसानों ने 141 हेक्टेयर भूमि पर खेती की है। जहां से कटाई के बाद पहले दिन करीब 900 क्विंटल गेहूं निकली है। यहां कुल 1100 क्विंटल गेहूं निकलने की उम्मीद है। मौसम अच्छा न होने के बावजूद यहां अच्छी पैदावार हुई है, जिससे अंदाजा होता है कि यह जमीन बेहद उपजाऊ है। अब यहां अगली फसल की तैयारी भी शुरू कर दी जाएगी और इस बार पांच गुना अधिक भूमि पर खेती करवाने का लक्ष्य है और आने वाले समय में तारबंदी के आगे की पूरी भूमि पर खेती करवाएंगे।

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बीएसएफ - फोटो : सोशल मीडिया

किसानों के साथ साए की तरह रहे बीएसएफ के जवान 

आईबी पर संघर्ष विराम के चलते तारबंदी के आगे खेती संभव हो पाई, लेकिन इसमें बीएसएफ की अहम भूमिका रही। जीरो लाइन पर 20-20 फुट की दूरी पर बीएसएफ के जवान तैनात रहे और किसान बेखौफ होकर खेती करते रहे। खेती शुरू कराने से लेकर कटाई तक बीएसएफ के जवान किसानों के साथ साए की तरह रहे। बीएसएफ के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे किसानों को पूरी सुरक्षा देंगे और किसान बिना किसी डर के अपने खेतों में काम कर सकता है।

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