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आस्था और इतिहास: 105 साल पुराने कश्मीर के शिव मंदिर का जीर्णोद्धार, यहीं फिल्माया गया था ये प्रसिद्ध गीत
Tue, 01 Jun 2021 09:48 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 01 Jun 2021 09:48 PM IST
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गुलमर्ग स्थित मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर का ताज कहलाए जाने वाले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सेना की पीर पंजाल ब्रिगेड ने अवाम की मदद के साथ करीब 105 साल पुराने शिव मंदिर का जीर्णोंद्धार कर उसे मंगलवार को प्रशासन को सौंप दिया। इस प्रसिद्ध मंदिर को कई बॉलीवुड फिल्मों में भी दर्शाया गया है। पर्यटन विभाग के निदेशक के अनुसार आने वाले दिनों में वह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई और जगहों पर भी इसी तरह का पुनर्निर्माण का काम शुरू करने वाले है, ताकि पर्यटकों को कुछ अलग देखने को मिले। मुमताज और राजेश खन्ना की बॉलीवुड फिल्म आप की कसम का गाना ...जय-जय शिव शंकर कांटा लगे न कंकर जिसे सुनने के बाद आज भी लोग थिरक उठते हैं इसी मंदिर में दर्शाया गया था। लेकिन समय की मार और देखरेख के अभाव के चलते मंदिर की हालत जर्जर हो गई थी। इस शिव मंदिर का रखरखाव करने वाले गुलाम मोहम्मद के अनुसार पिछले तीस सालों से वह इस मंदिर की देखभाल करते आए हैं, लेकिन काफी कोशिश करने पर भी मंदिर की जरूरी मरम्मत नहीं करवा सके। सेना ने इसका जीर्णोंद्धार कराया है।
गुलमर्ग स्थित मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
करीब तीन दशक की अनदेखी से मंदिर परिसर और उस तक पहुंचने वाली सीढ़ियों की हालत खराब हो गई थी, लेकिन कोरोना काल में घाटी में आने वाले पर्यटकों की संख्या शून्य होने का लाभ उठाते हुए सेना ने इस मंदिर की मरम्मत के कार्य की जिम्मेदारी ली और स्थानीय लोगो के साथ मिलकर मंदिर की मरम्मत शुरू कर दी। करीब तीन महीने बाद मंगलवार को इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया।
गुलमर्ग स्थित मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
1915 में महारानी मोहिनी बाई ने कराया था निर्माण
इस मंदिर का निर्माण 1915 में तत्कालीन महाराजा हरी सिंह की पत्नी महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने करवाया था। इस शिव मंदिर के एक तरफ गुलमर्ग का सेंट मेरी चर्च और दूसरी तरफ गुलमर्ग की जामा मस्जिद और गुरुद्वारा सिंह सभा जम्मू-कश्मीर की धर्मनिरपेक्षता और कश्मीरियत को दर्शाता है।
इस मंदिर का निर्माण 1915 में तत्कालीन महाराजा हरी सिंह की पत्नी महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने करवाया था। इस शिव मंदिर के एक तरफ गुलमर्ग का सेंट मेरी चर्च और दूसरी तरफ गुलमर्ग की जामा मस्जिद और गुरुद्वारा सिंह सभा जम्मू-कश्मीर की धर्मनिरपेक्षता और कश्मीरियत को दर्शाता है।
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गुलमर्ग स्थित मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
गुलमर्ग की जनता का प्रयास सराहनीय : ब्रिगेडियर
सेना की पीर पंजाल ब्रिगेड के ब्रिगेडियर बीस फोगाट के अनुसार भले ही मंदिर की मरम्मत का काम सेना ने शुरू किया हो, लेकिन असल काम गुलमर्ग की जनता ने किया है। यह कश्मीर की धर्मनिरपेक्षता और कश्मीरियत की एक असली मिसाल है।
सेना की पीर पंजाल ब्रिगेड के ब्रिगेडियर बीस फोगाट के अनुसार भले ही मंदिर की मरम्मत का काम सेना ने शुरू किया हो, लेकिन असल काम गुलमर्ग की जनता ने किया है। यह कश्मीर की धर्मनिरपेक्षता और कश्मीरियत की एक असली मिसाल है।
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गुलमर्ग स्थित मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को इस मंदिर को विशेष पूजा के बाद आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इस अवसर पर मंदिर के पुजारी, गुरुद्वारे के ग्रंथी, मस्जिद के इमाम और चर्च के पादरी सभी एक साथ मौजूद रहे, जोकि कश्मीरियत की असली मिसाल पेश कर रहा था।
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