लॉकडाउन में वायु प्रदूषण काफी घट गया है। इससे बादलों में छिपी पहाड़ियां दूर से ही दिखने लगी हैं। देशव्यापी लॉकडाउन के बीच जम्मू-कश्मीर में प्रदूषण का स्तर पचास फीसदी से भी अधिक गिर गया है। वाहनों की आवाजाही कम होने के साथ औद्योगिक इकाइयां बंद रहने से आसमान जहां इन दिनों साफ है वहीं विजिबिलिटी भी कई गुना बढ़ गई है।
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प्रदूषण घटा तो दिखने लगीं मनोरम पहाड़ियां
- फोटो : बासित जरगर
कठुआ, जम्मू, श्रीनगर शहर और आसपास के इलाकों से हिमाचल के पहाड़ धुंधले दिखाई देते थे। वहीं जम्मू के पहाड़ी इलाकों में हिमपात और बारिश के बाद प्रदूषण थमने से ही कभी कभार बर्फ से लदे पहाड़ों का साफ नजारा दिखाई देता था, लेकिन अब यह नजारा आम हो गया है।
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प्रदूषण घटा तो दिखने लगीं मनोरम पहाड़ियां
- फोटो : बासित जरगर
शाम के समय अपनी छटा बिखरेती सूर्य की किरणें इन दिनों आलौकिक नजारा दिखा रही हैं।
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प्रदूषण घटा तो दिखने लगीं मनोरम पहाड़ियां
- फोटो : बासित जरगर
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जम्मू सहित कठुआ में प्रदूषण का आंकड़ा 50 फीसदी तक कम हो गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स जहां डेढ़ सौ को भी पार करता रहा है वहीं इन दिनों यह 70 और 80 के बीच है। अगर बात करें माहौल की तो, चिनार के पत्तों की खनक, डल झील के पानी पर तैरते खूबसूरत शिकारे, गुलमर्ग की हंसी वादियां और कबूतरों की गुटरगूं से गुलजार रहने वाली घाटी में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। चिनार वैसा ही खूबसूरत है, डल झील भी उतनी ही सुंदर, कबूतर आज भी झुंड में गुटरगूं करते सुनाई देते हैं, बजाय इन सब के सन्नाटा पसरा हुआ है।
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प्रदूषण घटा तो दिखने लगीं मनोरम पहाड़ियां
- फोटो : बासित जरगर
अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध डल झील सूनी पड़ी है। अब यहां कोई पर्यटक नहीं दिखाई देता। शिकारे तो पहले की तरह ही सजे हैं पर उनके अंदर खामोशी बसी हुई है। गुलमर्ग में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। ट्यूलिप के फूल खिल चुके हैं, लेकिन शायद उन्हें पता नहीं कि इस दौर में अभी कोई आने वाला नहीं।