लद्दाख निवासी बुजुर्ग महिला ने कोरोना से जंग में जीत हासिल कर ली। यह महिला जम्मू-कश्मीर में पहली कोरोना संक्रमित मरीज थीं। एक माह तक मेडिकल कॉलेज जम्मू में भर्ती रही महिला की आंखों में घर जाने के दौरान खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि इस महामारी से जंग सरकार और चिकित्सकों द्वारा दिए जा रहे दिशानिर्देशों का पालन करने से ही जीती जा सकती है।
जम्मूः बुजुर्ग महिला ने कोरोना को दी मात, इनका संदेश बदल सकता है इस जंग की तस्वीर, जानें ऐसा क्या बोलीं
अस्पताल से छुट्टी देने से पूर्व भी दो बार टेस्ट किए गए। रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही उन्हें शुक्रवार को घर भेज दिया गया। उन्हें लेने बेटा और बेटी पहुंचे थे। महिला ने बताया कि वह राहत और खुशी महसूस कर रही है। उन्हें अस्पताल में घर जैसा माहौल मिला। शुरू में थोड़ी घबराहट हो रही थी, लेकिन अस्पताल स्टाफ के सहयोग से सब कुछ ठीक रहा।
वह निरंतर फोन के जरिए अपने परिवार से संपर्क में रहते हुए अस्पताल प्रशासन के दिशानिर्देशों का पालन करती रहीं। इससे उन्हें कोरोना वायरस से जंग जीतकर नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह अनुभव हासिल हुआ है कि कोरोना वायरस के मरीज इलाज से ठीक हो सकते हैं, बशर्ते दिशानिर्देशों का पालन किया जाए।
जीएमसी परिसर में अलग ही नजारा था। प्रिंसिपल, अधीक्षक के अलावा फैकल्टी और अन्य स्टाफ सदस्य तालियां बजाकर 63 वर्षीय महिला को सम्मान दे रहे थे। महिला मरीज ने हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन स्वीकार किया।
प्रिंसिपल डॉ. सुनंदा रैना ने कहा कि यह उन सभी पीड़ितों के लिए उदाहरण है जो अभी भी संक्रमित मरीजों के संपर्क में रहकर या अपनी यात्रा का इतिहास छिपा रहे हैं। ऐसे लोग खुद को ज्यादा संक्रमित करने के साथ समाज में कोरोना वायरस फैलाने का काम कर रहे हैं।