पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने प्रदेश के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर अक्सर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। कहा कि वह अपने नाम के अनुरूप व्यवहार नहीं करते। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, गोवा के राज्यपाल मलिक ने कहा कि दो क्षेत्रीय दलों ने पाकिस्तान के दबाव में चुनावों में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।
धमकी या नसीहत! सत्यपाल मलिक को लेकर उमर बोले- जब वह राज्यपाल न हों तब यह सब कहें और देखें
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दरअसल सत्यपाल मलिक ने शनिवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हम पंचायत चुनाव कराएंगे। मैं प्रोटोकॉल तोड़ते हुए उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के घर गया। उन्होंने पाकिस्तान के दबाव में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। आतंकवादियों ने भी धमकी दी। इसके बावजूद चुनाव सफलतापूर्वक हुए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर ने कहा कि प्रदेश के पूर्व राज्यपाल झूठ बोल रहे हैं।
उमर ने कहा कि वह सिर्फ नाम के सत्य काम के नहीं। वह झूठ बोलते कभी नहीं थकते। पांच अगस्त से पहले जम्मू-कश्मीर के लोगों से झूठ बोला और अब भी झूठ बोल रहे हैं। राजभवन की दीवारों के पीछे मानहानि के वाद से महफूज होने की वजह से वह कुछ भी कहने की हिम्मत कर रहे हैं। जब वह राज्यपाल न हों तब यह सब कहें और देखें।
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि आमतौर पर मैं उनकी निरर्थक बातों का जवाब नहीं देता लेकिन तब कुछ लोग यह मानने लगते हैं कि वह सच कह रहे हैं। मैंने माना कि उनके झूठ को झेलना मुश्किल है। इसलिए मैं उनके झूठ को भी नजरअंदाज नहीं करता।
पीडीपी और नेकां ने सितंबर 2018 में यह कहते हुए शहरी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों का बहिष्कार किया था कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। दोनों दलों ने घोषणा की थी कि वे तब तक चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे जब तक केंद्र और राज्यपाल प्रशासन 35-ए पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर देते जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है। केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-ए को खत्म कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था।