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कश्मीर से 90 फीसदी अखरोट देश-विदेश में है पहुंचता, इस साल हो सकता है 120 करोड़ का कारोबार
Sat, 19 Oct 2019 09:18 PM IST
Pranjal Dixit
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 19 Oct 2019 09:18 PM IST
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अखरोट की खेती
- फोटो : बासित जरगर
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कश्मीर घाटी से हर वर्ष देश के साथ-साथ विदेशों में अखरोट का निर्यात किया जाता है। देश में करीब 90 प्रतिशत अखरोट और गिरी कश्मीर से पहुंचती है। व्यापारियों के अनुसार हर वर्ष करीब 100 करोड़ का कारोबार होता है। इस बार फसल अच्छी होने के साथ-साथ त्योहारों के चलते 120 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार की उम्मीद है।
अखरोट की खेती
- फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित सीमावर्ती बारामुला सेक्टर का उड़ी कस्बा सीजफायर उल्लंघन के दौरान गोलीबारी की मार झेलता है और लगातार सुर्खियों में रहता है। मुख्य बात यह है कि इस क्षेत्र का देश और विदेश के लिए अखरोट और गिरी में 60 प्रतिशत योगदान है। हर वर्ष 100 मीट्रिक टन अखरोट का कारोबार यहीं से होता है। इसकी मांग भी बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए किसान भी उत्पादन को बढ़ा रहे हैं। बता दें कि उड़ी के लगामा इलाके में अखरोट की सबसे बड़ी मंडी है। जहां उड़ी के अलावा सारे कश्मीर का अखरोट पहुंचता है। इतना ही नहीं देश में बिकने वाले या निर्यात होने वाले अखरोट और गिरी का 90 प्रतिशत हिस्सा कश्मीर से जाता है।
अखरोट की खेती
- फोटो : बासित जरगर
बता दें कि जब भी कभी कश्मीर की बात होती है तो सिर्फ सेब की बात होती है, मगर कश्मीर में अखरोट छह जिलों में उगाया जाता है और इसे किसान सुरक्षित उत्पाद मानते हैं। क्योंकि इसकी सेल लाइफ बहुत है और यह हर सीजन में इस्तेमाल होता है। यह कश्मीर के 40 प्रतिशत लोगों को रोजगार देता है और यह बहुत अच्छा कारोबार है।
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अखरोट की खेती
- फोटो : बासित जरगर
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में दो दशक में अखरोट का 200, 6000 मीट्रिक टन से अधिक अखरोट का उत्पादन किया गया है और राज्य में इसकी मांग तेजी से बढ़ती देखी गई है। कश्मीरी अखरोट गिरी दुनिया में सबसे अच्छी मानी जाती है। व्यापारियों के अनुसार थोक बाजार में अखरोट की गिरी की मांग इस वर्ष 35 प्रतिशत बढ़ गई है। इस मांग को देखते हुए राज्य हॉटीकल्चर विभाग बेहतर किस्म का उत्पादन करने के लिए काम कर रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी फसल और पैसा मिल सकता है, लेकिन मुश्किलें भी काफी हैं। इस ड्राई फ्रूट का मुख्य उत्पादन करने वाला उड़ी गांव नियंत्रण रेखा के करीब है। जहां गोलाबारी व्यापार को प्रभावित करती है। इसका असर अखरोट की फसल पर पड़ता है।
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अखरोट की खेती
- फोटो : बासित जरगर
यहां से करीब 70 से 100 टन माल बाहर की मंडियों में जाता है। उड़ी के 20 प्रतिशत लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। 80 प्रतिशत लोग इसका उत्पादन करते हैं। यहां की गिरी साउथ एशिया में सबसे मीठी है। त्योहारों से पूर्व इस समय अच्छी मांग है और यहां से हर किस्म का माल जा रहा है। अच्छा रेट मिलने की उम्मीद है। हमारी मांग है कि हम लोगों को एग्रीकल्चर और हॉटीकल्चर विभाग के जरिये नई तकनीक के साथ-साथ बाहर से आने वाले हाइब्रिड प्लांट मिले, ताकि हम भी विश्व के साथ कंप्टीशन की दौड़ में आ जाएं।- अयाज फारूक, व्यापारी