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कश्मीर में सोशल मीडिया ने किया आतंकवाद को ग्लैमराइज, साल 2018 में 95 युवक आतंकी संगठनों में शामिल
Thu, 10 Jan 2019 05:28 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Thu, 10 Jan 2019 05:28 PM IST
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militants social media
- फोटो : अमर उजाला
सेना की सख्त कार्रवाई के बाद घाटी में आतंकवादी संगठनों के पनाहगारों में तो कमी आयी ही है। नापाक इरादे को संचालित करने के लिए कमांडर भी मिलने बंद हो गये हैं। ऐसे में आतंकी संगठनों ने आतंक की दुनिया को ग्लैमराइज कर कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद में धकेलने की चाल चली है। नए बनने वाले आतंकियों के आधुनिक हथियारों के साथ फोटो वायरल किये जा रहे हैं। आतंकियों के मरने के बाद सोशल मीडिया पर उनका हीरो की तरह वेलकम किया जा रहा है। आतंकियों की कहानी पेश कर युवाओं को आतंक की राह पर धकेलने के प्रयास किये जा रहे हैं। ये एक बड़ी वजह है कि कश्मीर के युवा आतंक की तरफ आकर्षित हो कर हथियार उठा रहे हैं।
आतंकी
- फोटो : Demo Pic
वर्ष 2018 में कश्मीर के 95 से अधिक युवक विभिन्न आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए हैं। इनमें 80 युवक सिर्फ हिजबुल मुजाहिदीन संगठन से जुड़े हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इन आतंकियों में 65 के करीब युवक इंजीनियर और अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त युवा शामिल हैं। जिनकी आयु 18 से 25 साल के बीच है। दक्षिण कश्मीर के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब कोई आतंकी मारा जाता है, तो उसका सोशल मीडिया पर हीरो की तरह वेलकम होता है। यह दूसरे युवकों को इस राह पर चलने को आकर्षित करता है।
तीन दर्जन लापता
कश्मीर के शोपियां, पुलवामा, अनंतनाग, कुलगाम, कुपवाड़ा के करीब तीन दर्जन ऐसे पढ़े लिखे युवक हैं, जो इस साल लापता हैं। एक युवक हाल ही में आतंकी बना है।
कश्मीर के शोपियां, पुलवामा, अनंतनाग, कुलगाम, कुपवाड़ा के करीब तीन दर्जन ऐसे पढ़े लिखे युवक हैं, जो इस साल लापता हैं। एक युवक हाल ही में आतंकी बना है।
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- फोटो : अमर उजाला
लापता होते ही अलर्ट होती हैं एजेंसियां
कश्मीर के छात्र दिल्ली एनसीआर में भी बड़ी संख्या में पढ़ रहे हैं। वहां इन छात्रों को पारिवारिक रोक टोक नहीं होती। ऐसे में आतंकी संगठन इन्हीं छात्रों को सॉफ्ट टारगेट के रूप में देखते हैं। संगठन से जुड़े ओजी वर्कर इन स्टूडेंट्स पर सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर उन्हें जिहाद के नाम पर आतंकवाद की तरफ धकेलते हैं। अलीगढ़ विश्वविद्यालय का पीएचडी स्कालर मन्नान वानी भी इसी तरह से संपर्क में आया था।
कश्मीर के छात्र दिल्ली एनसीआर में भी बड़ी संख्या में पढ़ रहे हैं। वहां इन छात्रों को पारिवारिक रोक टोक नहीं होती। ऐसे में आतंकी संगठन इन्हीं छात्रों को सॉफ्ट टारगेट के रूप में देखते हैं। संगठन से जुड़े ओजी वर्कर इन स्टूडेंट्स पर सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर उन्हें जिहाद के नाम पर आतंकवाद की तरफ धकेलते हैं। अलीगढ़ विश्वविद्यालय का पीएचडी स्कालर मन्नान वानी भी इसी तरह से संपर्क में आया था।
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सोशल साइट बना हथियार, ओजी वर्कर बने हैंडलर
यूनाइटेड जिहाद काउंसिल, तहरीक उल मुजाहिदीन, गजवा-तुल-हिंद, हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन कश्मीर में अपने फेसबुक पेज चला रहे हैं। इन पेजों पर किसी आतंकी की मौत के बाद उसे हीरो के रूप में पेश किया जाता है।
यूनाइटेड जिहाद काउंसिल, तहरीक उल मुजाहिदीन, गजवा-तुल-हिंद, हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन कश्मीर में अपने फेसबुक पेज चला रहे हैं। इन पेजों पर किसी आतंकी की मौत के बाद उसे हीरो के रूप में पेश किया जाता है।