लेह हिंसा के 20 आरोपियों से केस वापस: लद्दाख में पदयात्रा के बीच एलजी ने उठाया अहम कदम; कल संगठनों का बंद
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 24 सितंबर की लेह हिंसा में नामजद 20 व्यक्तियों के आपराधिक मामले वापस लिए। यह फैसला शांति बहाली और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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लेह और कारगिल में अधिकारों की मांग को लेकर पदयात्रा और लद्दाख बंद के आह्वान के बीच उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बुधवार को शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। पिछले वर्ष 24 सितंबर को लेह हिंसा में नामजद 20 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस ले लिए गए हैं। उपराज्यपाल ने इसकी मंजूरी दे दी है। ये फैसला क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द स्थापित करने और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
लद्दाख में इन दिनों छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे जैसी मांगों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज है। लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने हिंसा की पहली बरसी पर बुधवार को पदयात्रा निकाली। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लेह में पदयात्रा का नेतृत्व किया। हिंसा में चार लोगों की मौत और कई घायल हो गए थे। संगठनों ने वीरवार को लद्दाख बंद का भी आह्वान किया है। इसके चलते क्षेत्र का माहौल काफी संवेदनशील बना हुआ है।
इस घटनाक्रम के बीच उपराज्यपाल प्रशासन ने जनता के बीच विश्वास बहाली और तनाव कम करने के लिए 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने का अहम कदम उठाया है। पुलिस की व्यापक समीक्षा के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 360 के तहत लेह पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में इनके लिए क्लोजर रिपोर्ट की सिफारिश की गई थी।
एलजी सक्सेना ने कहा कि लंबी कानूनी प्रक्रियाओं और मुकदमेबाजी में उलझने के बजाय प्रशासन ने हीलिंग टच को प्राथमिकता दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस निर्णय से इन युवाओं को मुख्यधारा में लौटकर अपने जीवन और कॅरिअर में सकारात्मक रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।