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चिशोती गांव का दर्द: 75 घर, करीब 400 लोगों की आबादी, 10 मौतें, चार अब भी हैं लापता; हर घर में चीखों की गूंज

Sun, 17 Aug 2025 01:52 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 17 Aug 2025 01:52 PM IST
सार

जम्मू के किश्तवाड़ के चिशोती गांव में दर्दनाक मंजर है। इस गांव की करीब 400 लोगों की आबादी है। 75 घर हैं। तबाही में 10 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। चार अब भी लापता हैं। जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जश्न का माहौल होता था, वहां अब जेसीबी मशीनों का शोर और दर्द है।

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kishtwar cloudburst pain of Chishoti village 75 houses population of about 400 people 10 deaths four missing
किश्तवाड़ आपदा - फोटो : अमर उजाला
जम्मू के किश्तवाड़ के चिशोती गांव में अब मलबे का ढेर, तबाह हो चुके मकान और खौफ का माहौल है। यहां लापता लोगों की खोज का काम वीरवार से जारी है। इंसानों के साथ-साथ मकान भी सैलाब में बह गए हैं। करीब 75 घर और करीब 400 लोगों की आबादी वाला यह छोटा-सा गांव अचानक आए सैलाब से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 10 लोगों की मौत हो चुकी हैं जबकि चार लोग अब भी लापता हैं।


चिशोती गांव में हर घर में आंसुओं और चीखों की गूंज है। शुक्रवार को यहां नौ चिताएं जलीं। श्मशान घाट पर इतनी जगह नहीं है एक साथ इतनी चिताएं जलाई जाएं। इस लिए गांव वालों ने दो पालियों में चिताएं जलाईं। एक चिंता अभी ठंडी भी नहीं हुई थी दूसरे शव को जलाने की तैयारी हो जाती थी। 

 
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किश्तवाड़ आपदा - फोटो : अमर उजाला
वीरवार के बाद से गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला था। गांव में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में धार्मिक आयोजन होता था, लेकिन इस बार सिर्फ मलबे के नीचे अपनों की तलाश की जा रही है। गांव की सुखी देवी का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। 
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किश्तवाड़ आपदा - फोटो : अमर उजाला
'जिस बेटा-बेटी का सहारा था, वही चले गए'
उनकी 11 साल की बेटी सैलाब के बाद से लापता है, जबकि पिता की मौत हो चुकी है। वह एक साथ पति की लाश और बेटी की तलाश के बीच टूटती जा रही हैं। रोते हुए वह कहती हैं जिस बेटा-बेटी का सहारा था, वही चले गए। 

 
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आईजीपी जम्मू और डीआईजी डीकेआर - फोटो : अमर उजाला
मेरी बच्ची कहां होगी, नहीं पता। हम सब आंगन में थे, अचानक तेज आवाज सुनी और सैलाब सब कुछ ले गया। इसी गांव के बलवंत सिंह के पिता, जो मंदिर में थे, जब सैलाब आए वही पर थे, उसके बाद उनका पता नहीं चल पाया है। उनकी कोई खबर नहीं पा सके हैं। 

 
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किश्तवाड़ आपदा - फोटो : अमर उजाला
'मचैल माता ने किस गुनाह की सजा दी, नहीं पता'
गांव वालों का कहना है कि मचैल माता ने किस गुनाह की सजा दी, नहीं पता। वीरवार को सुबह मौसम ठीक था, बारिश थी, लेकिन इतना अंदाजा नहीं था की इस कदर सैलाब आएगा और सबकुछ कुछ ही मिनटों में बहा कर ले जाएगा। 

 
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