Kishtwar Flash Flood: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले के एक सुदूर गांव चशोती में शनिवार को लगातार तीसरे दिन बचाव और राहत अभियान जारी है। इस गांव में 60 लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। लापता लोगों का आंकड़ा 60 से 70 के बीच है। 14 अगस्त को दोपहर लगभग 12:25 बजे मचैल माता मंदिर जाने वाले रास्ते के आखिरी गांव चशोती में आई।
आपदा में एक अस्थायी बाजार, यात्रा के लिए एक लंगर (सामुदायिक रसोई) स्थल और एक सुरक्षा चौकी को तहस-नहस कर दिया। कम से कम 16 आवासीय घर और सरकारी इमारतें, तीन मंदिर, चार पनचक्की, एक 30 मीटर लंबा पुल और एक दर्जन से ज्यादा वाहन भी अचानक आई बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गए। 25 जुलाई से शुरू हुई और 5 सितंबर को समाप्त होने वाली वार्षिक मचैल माता यात्रा शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी स्थगित रही।
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किश्तवाड़ आपदा
- फोटो : अमर उजाला
भारी बारिश-भूस्खलन की चेतावनी के बाद भी नहीं चेते
वहीं, सामने आया है कि किश्तवाड़ के चिशोती त्रासदी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले छह दिनों से मौसम को लेकर जारी की गई चेतावनियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ा। रेड अलर्ट के बावजूद मचैल यात्रा जारी रही। घटना के समय यात्रा रूट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। तेजी से आए पानी और मलबे से लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
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मौसम विभाग ने जारी की थी ये चेतावनी
मौसम विभाग की ओर से गत 8 अगस्त को 13 से 15 अगस्त के बीच जम्मू संभाग के पुंछ, राजोरी, रियासी, रामबन, अनंतनाग का कुछ हिस्सों, किश्तवाड़, उधमपुर, डोडा में भारी से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। रेड अलर्ट को लेकर लगातार चेताया जा रहा था। यह भी कहा गया था कि 13 से 14 अगस्त के बीच मौसम ज्यादा खराब रहेगा। संबंधित जिला उपायुक्तों को इस बाबत जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इसके साथ ही आमजन के मोबाइल पर मैसेज करके मौसम संबंधी चेतावनी जारी की जा रही थी।
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रेड अलर्ट में जताई गई थी भूस्खलन और बाढ़ की आशंका
रेड अलर्ट में स्पष्ट रूप से भूस्खलन और बाढ़ की आशंका भी जताई गई थी। कुछ क्षेत्रों में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। अगर यात्रा को रेड अलर्ट अवधि में स्थगित कर दिया जाता तो इतनी मौतें शायद नहीं होतीं। किश्तवाड़ जिला मुख्यालय से मचैल माता का मंदिर का पड़ाव करीब 90 किलीमीटर की दूरी पर स्थित है। मुख्यालय से करीब 82 किमी. की दूरी पर चिशोती तक वाहन जाते हैं और उसी के पास यह घटना हुई। यहां से 8.5 किलोमीटर ही दूरी पर माता का मंदिर है, जहां पैदल जाना पड़ता है।
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डॉप्लर रडार, सैटेलाइट में सीमित क्षेत्र में अचानक भारी से भारी बारिश हुई
मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के निदेशक डॉ. मुख्तियार अहमद के अनुसार चिशौती में विभाग का कोई भी मौसम निगरानी केंद्र नहीं है। हालांकि सैटेलाइट और डॉप्लर रडार से पता चला है वीरवार दोपहर 12.30 से 1.30 बजे के बीच सीमित क्षेत्र में भारी से भारी बारिश हुई है। जिस तरह से वहां बारिश हुई उससे बादल फटने की आशंका है। उनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र में एक घंटे में 100 मिलीमीटर तक बारिश होने को बादल फटना माना जाता है।