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Jammu News: जम्मू के वैज्ञानिक डॉ. जबीर अहमद बने एनएएसआई फेलो
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फोटो सहित
- लैवेंडर की खेती से बायोटेक पार्क तक, जम्मू-कश्मीर में वैज्ञानिक नवाचार को दी नई दिशा
- ड्रग डिस्कवरी और शोध में योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला प्रतिष्ठित सम्मान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में विज्ञान, कृषि और तकनीकी नवाचार को नई दिशा देने वाले सीएसआईआर-आईआईआईएमजम्मू के निदेशक डॉ. जबीर अहमद को 2026 के लिए नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (एनएएसआई) का फेलो चुना गया है। राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मान उनके वैज्ञानिक योगदान के साथ जम्मू-कश्मीर में शोध को जमीन पर उतारने के प्रयासों की भी बड़ी पहचान है।
डॉ. अहमद ने जम्मू-कश्मीर में पर्पल रिवोल्यूशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। लैवेंडर की खेती, वैज्ञानिक तकनीक और इससे जुड़े उद्यमों को बढ़ावा देकर उन्होंने किसानों और युवाओं के लिए नए आर्थिक अवसर तैयार करने में योगदान दिया। खासतौर पर हिमालयी क्षेत्र में लैवेंडर को वैकल्पिक फसल के रूप में स्थापित करने की पहल को उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है।
उन्होंने कठुआ के घट्टी और हंदवाड़ा में दो इंडस्ट्रियल बायोटेक पार्क स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन केंद्रों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में बायोटेक आधारित उद्योगों, स्टार्टअप, शोध और तकनीक के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. अहमद को ड्रग डिस्कवरी और बायोमेडिकल रिसर्च में 29 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनके नेतृत्व में फाइटोफार्मास्युटिकल मिशन के तहत रूमेटाइड आर्थराइटिस और अल्जाइमर के लिए दो आईएनडी दाखिल किए गए हैं, जबकि पैंक्रियाटिक कैंसर के एक संभावित उपचार उम्मीदवार का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।
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150 से अधिक शोध पत्र और 15 पेटेंट
150 से अधिक शोध पत्र और 15 पेटेंट उनके नाम हैं। उन्होंने 15 पीएचडी और 65 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। एनएएसआई फेलोशिप से सम्मानित होना उनके वैज्ञानिक योगदान के साथ जम्मू-कश्मीर में विज्ञान आधारित विकास की दिशा में किए गए कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी माना जा रहा है।
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- लैवेंडर की खेती से बायोटेक पार्क तक, जम्मू-कश्मीर में वैज्ञानिक नवाचार को दी नई दिशा
- ड्रग डिस्कवरी और शोध में योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला प्रतिष्ठित सम्मान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में विज्ञान, कृषि और तकनीकी नवाचार को नई दिशा देने वाले सीएसआईआर-आईआईआईएमजम्मू के निदेशक डॉ. जबीर अहमद को 2026 के लिए नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (एनएएसआई) का फेलो चुना गया है। राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मान उनके वैज्ञानिक योगदान के साथ जम्मू-कश्मीर में शोध को जमीन पर उतारने के प्रयासों की भी बड़ी पहचान है।
डॉ. अहमद ने जम्मू-कश्मीर में पर्पल रिवोल्यूशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। लैवेंडर की खेती, वैज्ञानिक तकनीक और इससे जुड़े उद्यमों को बढ़ावा देकर उन्होंने किसानों और युवाओं के लिए नए आर्थिक अवसर तैयार करने में योगदान दिया। खासतौर पर हिमालयी क्षेत्र में लैवेंडर को वैकल्पिक फसल के रूप में स्थापित करने की पहल को उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है।
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उन्होंने कठुआ के घट्टी और हंदवाड़ा में दो इंडस्ट्रियल बायोटेक पार्क स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन केंद्रों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में बायोटेक आधारित उद्योगों, स्टार्टअप, शोध और तकनीक के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. अहमद को ड्रग डिस्कवरी और बायोमेडिकल रिसर्च में 29 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनके नेतृत्व में फाइटोफार्मास्युटिकल मिशन के तहत रूमेटाइड आर्थराइटिस और अल्जाइमर के लिए दो आईएनडी दाखिल किए गए हैं, जबकि पैंक्रियाटिक कैंसर के एक संभावित उपचार उम्मीदवार का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।
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150 से अधिक शोध पत्र और 15 पेटेंट
150 से अधिक शोध पत्र और 15 पेटेंट उनके नाम हैं। उन्होंने 15 पीएचडी और 65 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। एनएएसआई फेलोशिप से सम्मानित होना उनके वैज्ञानिक योगदान के साथ जम्मू-कश्मीर में विज्ञान आधारित विकास की दिशा में किए गए कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी माना जा रहा है।