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ग्राउंड रिपोर्ट: दो कमरों के फ्लैट में रहने को मजबूर कश्मीरी पंडित बोले- हमारा राजनीतिक इस्तेमाल न करें, बुनियादी सुविधाएं दें

Sat, 19 Mar 2022 10:14 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 19 Mar 2022 10:14 PM IST
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kashmiri pandit said do not use us politically give basic facilities
जगती टाउनशिप और वहां रहने वाले कश्मीरी पंडित - फोटो : amar ujala

'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म के जरिए एक बार फिर कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का मुद्दा चर्चा में है। फिल्म के जरिए कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों को बयां किया गया है। वहीं जगती टाउनशिप में दो कमरों के क्वार्टर में रह रहे कश्मीरी पंडितों के चेहरों पर घर वापसी नहीं होने की कसक साफ झलकती है। सरकारी उदासीनता के चलते वह विस्थापन के दर्द से आज तक नहीं उबर नहीं पाए हैं। यहां रहने वाले कश्मीरी पंडितों का कहना है कि हमारा राजनीतिक इस्तेमाल न हो, सरकार हमें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए।  


 

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जगती टाउनशिप - फोटो : amar ujala

जगती टाउनशिप में 4300 कश्मीरी पंडित परिवार रहते हैं, जो स्वास्थ्य, साफ पानी और निर्बाध बिजली आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजार रहे हैं। जगती स्थित उपजिला अस्पताल में जरूरी दवाएं नहीं मिलतीं। गायनी वार्ड नहीं होने से महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रसव पीड़ा के समय जम्मू जाना पड़ता है। यहां रहने वाले पंडितों ने सरकार से मिलने वाली 13 हजार रुपये की राहत राशि को भी नाकाफी बताया। कहा कि महंगाई के दौर में इस राशि से घर का खर्च चलाना बड़ी चुनौती है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि सरकारों ने हमारा राजनीतिक इस्तेमाल किया है। आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। 

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शादी लाल पंडिता - फोटो : amar ujala

घर वापसी करवा कर जख्मों पर मरहम लगाए सरकार
सरकार को अगर वास्तव में हमारी चिंता है तो हमारी घर वापसी करवाकर जख्मों पर मरहम लगाए। सरकार घर वापसी की पहल करे और वहां पर तीन टाउनशिप बनाई जाएं। कश्मीरी पंडित राहत राशि में बढ़ोतरी की मांग को लेकर 526 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार ने हमारा इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया है। जगती टॉउनशिप में रहने वाले लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कश्मीरी पंडितों को स्वास्थ्य सहायता नहीं मिल रही। फ्लैटों की हालत दयनीय है। बाथरूम में लीकेज है, जिससे गंदा पानी घर में भर जाता है। - शादी लाल पंडिता, अध्यक्ष, जगती टाउनशिप और सोन कश्मीर  

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पिंटो पंडिता - फोटो : amar ujala

कश्मीरी पंडित युवाओं के लिए बड़ी समस्या बेरोजगारी 
कश्मीर पंडित युवा शिक्षित हैं, लेकिन रोजगार से वंचित हैं। सरकार को हर घर में नौकरी देनी चाहिए। सरकार पंडितों की घर वापसी की बात करती है, लेकिन पीएम पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में नौकरी कर रहे कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था नहीं कर पाई। ऐसे में 44 हजार परिवारों की व्यवस्था करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। हर तीन साल बाद मौजूदा राहत राशि में 30 फीसदी की बढ़ोतरी करने की बात की थी, लेकिन 2021 से इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई। महंगाई बढ़ रही है, लेकिन राहत राशि उतनी ही है। -पिंटो पंडिता,  महासचिव विश्व कश्मीरी समाज 
 

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अंजलि भट्ट, अनिता पंडिता, अंजलि रैना - फोटो : amar ujala

अस्पताल में गायनी वार्ड नहीं, जम्मू जाना पड़ता है
32 सालों में कश्मीरी पंडितों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। पहले कैंप में रहते थे और अब टाउनशिप में रह रहे हैं। दोनों स्थानों पर सुविधाओं का अभाव है। उप-जिला अस्पताल जगती में महिलाओं के लिए सुविधा न के बराबर है। अस्पताल में गायनी वार्ड नहीं है। प्रसव पीड़ा के दौरान जम्मू जाना पड़ता है। अस्पताल में बेड तो है, लेकिन जरूरी उपकरण नहीं हैं। हर व्यक्ति दूषित पानी की आपूर्ति से परेशान है, जिससे बीमारियां भी फैल रही हैं। टॉउनशिप में बने पार्क बदहाल हैं। इनकी मरम्मत नहीं होती और बरसात में छत टपकती हैं। -अंजलि भट्ट, अनिता पंडिता, अंजलि रैना-कश्मीरी महिलाएं 
 

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