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डल में शिकारे का आनंद उठा रहे हैं विदेशी पर्यटक, तस्वीरों में देखिए कुछ ऐसा है हाल-ए-कश्मीर
Wed, 25 Sep 2019 01:49 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 25 Sep 2019 01:49 PM IST
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डल झील
- फोटो : बासित जरगर
कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या में मौजूदगी विदेशी पर्यटकों को भी सुरक्षा का अहसास करा रही है। यही कारण है कि आतंकी गतिविधियों से बेखौफ पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। बुधवार को विश्व प्रसिद्ध डल झील में विदेशी पर्यटक शिकारे का आनंद उठाते नजर आए।
डल झील
- फोटो : अमर उजाला
घाटी में पाबंदियां दिन में हटाई जा चुकी हैं। सड़कों पर निजी वाहन दौड़ रहे हैं। कुछ इलाकों में दुकानें भी नियत समय के लिए खुल रही हैं। बुधवार को राज्य में लगाई गई पाबंदियों का 52वां दिन था।
डल झील
- फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों ने बताया कि कुछ संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के मद्देनजर जवानों की तैनाती है। इसके अलावा जरूरत के हिसाब से विभिन्न इलाकों में पाबंदियां बढ़ा दी जाती हैं। मसलन प्रत्येक शुक्रवार को नमाज के दौरान भीड़ की आड़ में आतंकी किसी घटना को अंजाम न दे पाएं इसलिए पाबंदियां बढ़ा दी जाती हैं। जो बाद में हटा ली जाती हैं।
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डल झील
- फोटो : बासित जरगर
अधिकारियों के अनुसार, घाटी में लैंडलाइन टेलीफोन पूरी तरह से काम कर रहे हैं। जबकि उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में मोबाइल फोन भी काम कर रहे हैं। अफवाह व असामाजिक हरकतों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद हैं।
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डल झील
- फोटो : अमर उजाला
केपीसी ने की संचार नाकेबंदी खत्म करने की मांग
उधर मंगलवार को कश्मीर प्रेस क्लब ने संचार माध्यमों पर पाबंदी तुरंत समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि इससे समाचारों का संकलन व संप्रेषण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले सप्ताह प्रेस क्लब से जुड़े सदस्यों की एक सूची व मोबाइल नंबरों की लिस्ट अधिकारियों को सौंपी गई थी परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। संचार नाकाबंदी के कारण विभिन्न श्रोतों से प्राप्त जानकारियों की पुष्टि भी नहीं हो पा रही है।
उधर मंगलवार को कश्मीर प्रेस क्लब ने संचार माध्यमों पर पाबंदी तुरंत समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि इससे समाचारों का संकलन व संप्रेषण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले सप्ताह प्रेस क्लब से जुड़े सदस्यों की एक सूची व मोबाइल नंबरों की लिस्ट अधिकारियों को सौंपी गई थी परंतु कोई लाभ नहीं हुआ। संचार नाकाबंदी के कारण विभिन्न श्रोतों से प्राप्त जानकारियों की पुष्टि भी नहीं हो पा रही है।