कारोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर की चपेट में आने वाले मरीजों की जान बचाना डॉक्टरों के अलावा फ्रंट लाइन कोरोना योद्धाओं के लिए चुनौती बन गई है। नए मामलों की रफ्तार काफी ज्यादा होने की वजह से मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। मधुमेह रोग से पीड़ित मरीज जिन्हें कोरोना हो जाता है, उन्हें अगर निमोनिया हो जाए या उनकी शूगर जंप कर 500 पहुंच जाए तो उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। ऐसे मरीजों का घर में आइसोलेशन में रहकर उपचार नहीं हो सकता।
डॉक्टर की सलाह: मधुमेह रोगियों को कोरोना के साथ निमोनिया हो तो तुरंत अस्पताल जाएं, ये भी करें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू में मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश कक्कड़ के अनुसार कोरोना संक्रमण अब सामुदायिक स्तर पर फैल चुका है। ऐसे में मधुमेह रोगियों को बहुत जरूरी काम हो तो ही घर से बाहर निकलना चाहिए। निमोनिया होने पर मधुमेह रोगियों को इंसुलिन देना जरूरी होता है। यह अस्पताल में ही हो पाएगा। ऐसे में समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए और अस्पताल पहुंचकर उपचार करवाने में ही समझदारी होगी।
डॉक्टर का कहना है कि मधुमेह रोग से ग्रसित मरीज हों या आम लोग, वह तभी कोरोना संक्रमण से अपना बचाव कर सकते हैं, जब वह घर से बाहर निकलने के दौरान संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति से सामाजिक दूरी का पालन करेंगे।
उदाहरण के तौर पर घर से निकलने पर डबल मास्क लगा लेना चाहिए। जिसमें नीचे वाला मास्क सर्जिकल हो और ऊपर कपड़े वाला मास्क होना चाहिए। जब तक वैक्सीन देश के सभी नागरिकों को नहीं लग जाती, तब तक अतिरिक्त सतर्कता बरतनी ही पड़ेगी।
- अपनी बारी आने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं।
- मधुमेह रोगी तनाव न लें।
- घर से अकारण न निकलें।
- कोविड के लक्षण दिखें तो टेस्ट जरूर करवाएं।