सूफी संत शेख सैयद अब्दुल कादिर जीलानी की याद में सोमवार को श्रीनगर में लोगों का हुजूम उमड़ा। इस दौरान अकीदतमंदों का तांता लगा रहा। कोई मन्नत-मुराद मांगने में मशगूल रहा तो कोई बीमारी से शिफा के लिए अर्जियां लगाता रहा।
जीलानी...वह सूफी संत जिसे मुसलमान गौस-ए-आजम तो हिंदू काहनूव संत कहते हैं, जानिए कुछ विशेष बातें
श्रीनगर के खानयार में स्थित 200 वर्षों से भी ज्यादा पुरानी दरगाह जोकि सूफी संत शेख सैयद अब्दुल कादिर जीलानी की यादों को समेटे हुए है, इसका निर्माण 18वीं शताब्दी में किया गया था। इसे सामान्यतः दस्तगीर साहिब दरगाह के नाम से जाना जाता है।
शेख अब्दुल कादिर को सूफी मत के कदरिया शाखा का जनक माना जाता है। माना जाता है कि शेख अब्दुल कादिर साहब इस दरगाह में कभी नहीं आए, लेकिन उनके एक शिष्य शेख सखी शाह ने उनसे जुड़ी यादगार वस्तुओं को इस दरगाह में संग्रहीत किया था। तबसे इस दरगाह का नाम दस्तगीर साहिब दरगाह पड़ गया।